NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत से परिवार सदमे में, परीक्षा विवाद के बीच उठे कई सवाल

आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। खेती-किसानी से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने बेटी की शिक्षा के लिए अतिरिक्त मेहनत की।;

Update: 2026-06-04 09:32 GMT

भोपाल। Akanksha chaturvedi Death: मध्य प्रदेश के नवगठित मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। आकांक्षा मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थीं और उनके परिजनों को उम्मीद थी कि इस बार उनका चयन किसी प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में हो जाएगा। परिवार का आरोप है कि परीक्षा से जुड़े विवादों और अनिश्चितता ने उनकी बेटी पर गहरा मानसिक दबाव डाला था। घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में भी शोक का माहौल है। आकांक्षा को एक मेहनती और महत्वाकांक्षी छात्रा के रूप में याद किया जा रहा है, जिसने डॉक्टर बनने का सपना देखा था।

परिवार ने बेटी के भविष्य के लिए किए थे बड़े प्रयास 

आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि परिवार ने सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। खेती-किसानी से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने बेटी की शिक्षा के लिए अतिरिक्त मेहनत की। परिजनों के अनुसार, आकांक्षा को NEET की तैयारी के लिए नागपुर के एक निजी कोचिंग संस्थान में भेजा गया था। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए परिवार ने किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लगभग तीन लाख रुपये का ऋण भी लिया था।

कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि वह नागपुर में रहकर काम भी करते थे, ताकि बेटी की पढ़ाई का खर्च सुचारु रूप से चलता रहे। परिवार को विश्वास था कि आकांक्षा की मेहनत रंग लाएगी और वह डॉक्टर बनकर परिवार का नाम रोशन करेंगी।

उम्मीदों से भरा था भविष्य

परिवार के लोगों का कहना है कि आकांक्षा पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थीं। हाल ही में हुई परीक्षा में उन्हें अच्छे अंक मिलने की उम्मीद थी। परिजनों के मुताबिक, वह अक्सर अपने भविष्य की योजनाओं पर बात करती थीं और डॉक्टर बनने के सपने को लेकर उत्साहित रहती थीं। आकांक्षा के पिता भावुक होकर कहते हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन मीडिया उनकी बेटी की सफलता की कहानी दिखाएगा, जब उसके नाम के आगे “डॉ.” लिखा होगा। लेकिन परिस्थितियां कुछ और ही बन गईं।

परीक्षा विवाद के बाद बढ़ी चिंता

परिवार का आरोप है कि NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और बाद में परीक्षा रद्द होने की खबरों ने आकांक्षा को परेशान कर दिया था। उनका कहना है कि वह भविष्य को लेकर चिंतित रहने लगी थीं और परीक्षा प्रक्रिया में पैदा हुई अनिश्चितता से निराश थीं। 

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं

इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों और उनके परिवारों की वर्षों की मेहनत किसी भी तरह की अनियमितता से प्रभावित नहीं होनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

NEET 2026 परीक्षा विवाद क्या है?

NEET UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। इसके बाद विभिन्न स्थानों से परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की आशंकाओं की खबरें सामने आईं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 7 मई को शिकायतें मिलने की बात स्वीकार की और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी। बाद में परीक्षा रद्द करने और पुनर्परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद नई परीक्षा तिथि की घोषणा की गई। पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता

आकांक्षा की मौत के बाद एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर पड़ने वाले दबाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा संबंधी तनाव, भविष्य की चिंता और प्रतिस्पर्धा के माहौल में छात्रों को भावनात्मक सहयोग और परामर्श उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रियाओं और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े करती है।

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