खैरा जलाशय के गेट मरम्मत के नाम पर लीपापोती

 चार लाख की लागत से खैरा जलाशय की मरम्मत कार्य में जमकर लापरवाही की गई है

Update: 2018-01-10 13:31 GMT

रतनपुर।  चार लाख की लागत से खैरा जलाशय की मरम्मत कार्य में जमकर लापरवाही की गई है। आधे अधूरे मरम्मत कार्य में ठेकेदार मनमानी कर शासन और किसानो को चूना लगा रहे है।वही आला अधिकारी की कार्यशैली पर भी ग्रामीण आरोप लगा रहे है । गुणवत्ताहीन मरम्मत कार्य को लेकर जिसके कारण ग्रामीणो में जन आक्रोश पनप रहा है।

ग्राम पंचायत खैरा बॉध में स्लूस गेट की मरम्मत कार्य नही होने से किसानो को पानी की कमी होने से खेतो में सिचाई करने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सिंचाई विभाग की उदासीनता से हर वर्ष बरसात का पानी बांध से  बह जाता है।जिससे किसानो को पर्याप्त पानी उपलब्ध नही होता है। जल संसाधन विभाग के द्वारा जिला संसाधन संस्थान न्यास मद से खैरा जलाशय मरम्मत कार्य किया गया है। मरम्मत कार्य की लागत राशि चार लाख रूपये से किया गया है जिसका बेरोजगार इंजीनियर टेंडर के तहत रामकुमार रजक बिलासपुर द्वारा मरम्मत कार्य किया गया।

ठेकेदार द्वारा मरम्मत के नाम पर महज खाना पूर्ती की गयी है।चार लाख की लागत से स्लूस गेट की मरम्मत कार्य को आधे.अधूरे कर जमकर मनमानी की गयी है। वही विभाग के आला अधिकारी भी मरम्मत कार्य मे बरती जा रही अनियमितताओ पर मूकदर्शक बने खड़े हुए है। स्लूस गेट की दरारे आंखे खोले भ्रष्टाचार को बयां कर रही है। वही किसानों को लाभ देने के मामले में विभाग बेमानी साबित हो रही है।गुणवत्ताहीन कार्य को लेकर ठेकेदार और अधिकारी के ऊपर ग्रामीणो में जिसके कारण जन आक्रोश पनप रहा है।

मरम्मत कार्य के नाम पर खानापूर्ति

खैरा जलाशय में चार लाख की लागत से मरम्मत की गयी  है। स्लूस गेट में केवल खानापूर्ति की गई है। स्लूस गेट के  सभी हिस्से में दरार है जिसे नजर अंदाज किया गया है केवल पुराने बेरल का निर्माण किया गया है जिस पर स्तरहीन सामग्री का उपयोग किया गया।

आला अधिकारियों पर उठ रहे सवाल

जल संसाधन विभाग के आला अधिकारियो की देख रेख मे गेट का मरम्मत कार्य किया गया है। मरम्मत कार्य मे की गई मनमानी को केवल मूकदर्कश बने देखते रहे। ग्रामीणों को भी लगने लगा की अब जिम्मेदार अधिकारी भी ठेकेदारों की मनमानी में अपनी हाथ सेकने में लगे हुए है।

मरम्मत के नाम पर लीपापोती

ठेकेदार द्वारा मरम्मत कार्य मे लापरवाही की गई है। स्लेस गेट मे अभी भी दरार है।शासन की योजनाओ का ठेकेदार और अधिकारी भी लाभ ले रहे है।मरम्मत के नाम पर केवल दिखावा किया गया है।

कोई दरार नहीं

पुराने बेरल को तोड़कर नया बनाया गया है।सामने हिस्से को नही तोड़ा गया है।गेट मे कोई दरार भी नही है।

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