एक महिला के दो नाम, दो पिता और पति भी दो!

कोरबा ! एसईसीएल में नौकरी हथियाने के लिए एक महिला ने अपने रिश्तेदार के साथ मिलकर ऐसी जालसाजी की जिससे मूल भू-स्वामी दर-दर की ठोकर खा रहा है।

Update: 2017-05-10 03:58 GMT

0 21 साल से फर्जी दस्तावेजों के जरिये चल रही नौकरी
0 मूल भू-स्वामी खा रहा दर-दर की ठोकरें

कोरबा !   एसईसीएल में नौकरी हथियाने के लिए एक महिला ने अपने रिश्तेदार के साथ मिलकर ऐसी जालसाजी की जिससे मूल भू-स्वामी दर-दर की ठोकर खा रहा है। उक्त महिला ने न सिर्फ अपने दो नाम रखकर कूटरचना की बल्कि दो पिता और पति भी दो दर्शाकर दो लोगों को नौकरी दिलवा दी।
जानकारी के अनुसार मानस नगर सीएसईबी कोरबा पूर्व निवासी प्रेमलाल साहू पिता हीरालाल साहू 50 वर्ष ने वर्ष 1993 में ढेलवाडीह में चमरादास से खसरा नंबर 113/2 एवं 220/2 की 5-5 डिसमिल जमीन क्रय की थी। उक्त जमीन प्रेमलाल ने राजस्व रिकार्ड में अपने नाम पर दर्ज भी करवा ली और भू स्वामी बना। वर्ष 1994 में एसईसीएल के ढेलवाडीह परियोजना के लिए यह भूमि भी अधिग्रहित की गई। भूमि के एवज में उसने नौकरी की आस में आज तक मुआवजा नहीं उठाया। एसईसीएल के अधिकारियों ने नौकरी लगने के बाद मुआवजा उठाने कहा। इधर परियोजना प्रभावितों में शामिल 220 लोगों की सूची नौकरी के लिए निकाली गई और वर्ष 2009 में पूरी भर्ती खत्म हुई लेकिन प्रेमलाल का नाम नहीं आया। इससे हतप्रभ प्रेमलाल ने जब एसईसीएल दफ्तर में जाकर पता किया तो चौंकाने वाली जानकारी मिली की उसके खाता में रविशंकर तिवारी नाम का व्यक्ति 2010 से नौकरी कर रहा है। प्रेमलाल ने अपने खाता में दूसरे के द्वारा की जा रही नौकरी के विषय में सूचना का अधिकार के तहत जानकारी निकलवाई तो परत दर परत फर्जीवाड़ा उजागर होता चला गया।
पति को लगवाई नौकरी
प्रेमलाल साहू ने बताया कि उसने जमीन ग्राम अरदा स्कूल में पदस्थ शिक्षक लोमश तिवारी के जरिये ये जमीन खरीदी थी। लोमश ने अपने चचेरी बहन कुमुद पिता देवी प्रसाद तिवारी मूल निवासी ग्राम कुरियारी शिवरीनारायण का काल्पनिक नाम रजनी रखा और मिलता जुलता नाम प्रेमलाल साहू की जगह प्रेमलाल तिवारी पिता हीरालाल तिवारी रखकर वास्तविक खातादार प्रेमलाल को रजनी ने पिता बताकर बिना मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किये 1994 में अपने नाम पर फौती नामांतरण करा लिया। इसके बाद प्रेमलाल साहू की ख.न. 113/2 व 220/2 जमीन के एवज में कथित रजनी (कुमुद) ने अपने पति रविशंकर तिवारी को एसईसीएल अधिकारियों से सांंठ-गांठ कर ढेलवाडीह परियोजना में नौकरी लगवा दी।
अपने खाते में पति का कोई और नाम
पीडि़त प्रेमलाल साहू के मुताबिक फर्जी ढंग से रजनी बनी कुमुद पिता देवी प्रसाद द्वारा 113/7 खसरा नंबर की 5 डिसमिल जमीन खरीदी गई थी जिसे एसईसीएल द्वारा अधिग्रहण बाद इसके एवज में कुमुद ने बसंत कुमार पांडेय पिता नर्मदा प्रसाद पांडेय को सिंघाली परियोजना में नौकरी दिलवा दी और उसे अपना पति बताया। इस तरह कुमुद ने रजनी बनकर फर्जी पिता पे्रमलाल तिवारी और फर्जी पति बसंत कुमार के माध्यम से फर्जीवाड़ा किया है।
1993 में मृत पिता ने 2012 में किया हस्ताक्षर
आरटीआई से निकलवाई जानकारी के हवाले से पीडि़त ने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में दलाल प्रथा का अचंभित करने वाला मामला उजागर किया है। कुमुद ऊर्फ रजनी पिता देवी प्रसाद मूल रूप से ग्राम कुरियारी जिला जांजगीर-चांपा की रहने वाली है और उसका पति रविशंकर तिवारी है। जिसकी पुष्टि ग्राम पंचायत कुरियारी की सरपंच बिरस बाई ने की है। दूसरी ओर आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार प्रेमलाल तिवारी पिता हीरालाल जिसकी मृत्यु 15 दिसंबर 1993 को सीतामणी स्थित निवास में होना बताकर बतौर आवेदक पुत्री रजनी तिवारी ने मृत्यु प्रमाण पत्र हेतु वर्ष 2013 में कोरबा निगम में आवेदन किया। इस आवेदन पर निगम से 21 अक्टूबर 2013 को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया। दूसरी ओर पुत्री रजनी तिवारी का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए प्रेमलाल तिवारी के द्वारा जुलाई 2012 में निगम में आवेदन जमा किया जाता है जिसका पंजीयन क्रमांक 3178 है। सवाल लाजमी है कि जब प्रेमलाल तिवारी की मौत वर्ष 1993 में हो चुकी है तो 2012 में उसने आवेदन में हस्ताक्षर कैसे किया। जन्म प्रमाण पत्र के लिए कोई रामकुमार पटेल बैंक में चालान जमा करता है और इनके सीतामणी में निवासरत रहने तथा कथित प्रेमलाल तिवारी की मृत्यु के पंचनामा को पार्षद बंशी महिलांगे द्वारा भी प्रमाणित किया गया।

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