माकपा नेता एमएम मणि के धमकी भरे बयान से सियासी तूफान

केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एमएम मणि ने पार्टी के पूर्व सहयोगी और हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए पूर्व देविकुलम विधायक एस राजेंद्रन के खिलाफ कड़ी और धमकी भरी टिप्पणियां कीं है

Update: 2026-01-26 05:25 GMT

पूर्व विधायक राजेंद्रन पर मणि का हमला, विपक्ष ने कहा– खुली धमकी

  • भाजपा में शामिल राजेंद्रन पर मणि की टिप्पणी से गरमाई राजनीति
  • कांग्रेस-भाजपा ने माकपा पर साधा निशाना, हिंसा और असहिष्णुता का आरोप

इडुक्की। केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता एमएम मणि ने पार्टी के पूर्व सहयोगी और हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए पूर्व देविकुलम विधायक एस राजेंद्रन के खिलाफ कड़ी और धमकी भरी टिप्पणियां कीं है।

श्री मणि ने पार्टी समर्थकों को संबोधित करते हुए रविवार को कहा कि श्री राजेंद्रन को कार्यकर्ताओं द्वारा 'संभाला जाना चाहिए' और टिप्पणी की कि जब कोई पार्टी को चुनौती देता है तो पार्टी को कुछ भी करने से डरना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि माकपा किसी को भी जीवनभर राजनीतिक पद देने के लिए बाध्य नहीं है और श्री राजेंद्रन की आलोचना की कि सालों तक पार्टी के फायदे उठाने के बाद वह पार्टी के खिलाफ हो गए। मुन्नार में एक सार्वजनिक सभा में श्री मणि के बयानों से पूरे राजनीतिक क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रियाएं हुई हैं। विपक्षी दलों ने सत्ताधारी पार्टी पर खुले तौर पर राजनीतिक धमकी का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

श्री मणि ने श्री राजेंद्रन के दल-बदल का जिक्र करते हुए कहा कि इससे माकपा को कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह भाजपा में शामिल होते हैं या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में। श्री मणि ने कहा कि जो कोई भी पार्टी का समर्थन पाने के बाद उसे चुनौती देता है- 'भले ही वह खुद एमएम मणि ही क्यों न हों'-उससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए। इन टिप्पणियों को व्यापक रूप से खुली धमकी के रूप में देखा गया।

भाजपा ने श्री मणि के बयान की कड़ी निंदा करते हुए माकपा पर अपने 'सच्चे अधिनायकवादी और हिंसक चरित्र' को दिखाने का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं ने कहा कि ये टिप्पणियां एक राजनीतिक विरोधी के खिलाफ सार्वजनिक धमकी के बराबर हैं और श्री मणि के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस भी श्री मणि के खिलाफ मजबूती से सामने आई और माकपा पर राजनीतिक हिंसा और असहिष्णुता की संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

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