जेएनयू नारेबाजी : पुलिस के बुलावे पर नहीं आए छात्र, खाली हाथ लौटी टीम
नौ फरवरी, 2016 को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर हुई देश-विरोधी नारेबाजी में पूछताछ के लिए पुलिस ने 30 लोगों की सूची तैयार कर उनसे पूछताछ की योजना बनाई थी
नई दिल्ली। नौ फरवरी, 2016 को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर हुई देश-विरोधी नारेबाजी में पूछताछ के लिए पुलिस ने 30 लोगों की सूची तैयार कर उनसे पूछताछ की योजना बनाई थी, लेकिन जब टीम जेएनयू कैंपस में पहुंचे, तो वहां टीम को सभी छात्र नदारद दिखे।
दरअसल, पुलिस की टीम ने 30 छात्रों की सूची बनाकर जेएनयू प्रशासन से छात्रों को बुलाने का आग्रह किया था, जिससे छात्रों से नौ फरवरी की रात के बारे में पूछताछ की जा सके।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों की मानें तो सभी छात्रों से पूछताछ के लिए जेएनयू प्रशासन से आग्रह किया गया है और जेएनयू प्रशासन की सुविधानुसार उन छात्रों से पूछताछ की जाएगी।
उन्होंने बताया कि सूची में जिन छात्रों के नाम हैं, वह महज संभावित चश्मदीद हैं और आरोपी नहीं है, इसलिए पुलिस उनको पूछताछ के लिए नहीं बुला रही है।
इससे पहले पूरे मामले में पुलिस की टीम ने जेएनयू प्रशासन को पत्र लिखते हुए पूछताछ करने का आग्रह किया था, जिसमें तीस छात्रों के नाम लिखे हुए थे और पुलिस उन छात्रों से नौ फरवरी की रात के बारे में पूछताछ करेगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस की टीम ने जेएनयू प्रशासन से सभी छात्रों को बुलाने की बात कही थी, तो वहीं टीम ने गुरूवार, शुक्रवार व शनिवार को उन छात्रों से पूछताछ की योजना बनाई थी।
उन्होंने बताया कि पुलिस की टीम गुरूवार दोपहर को जेएनयू के प्रशासनिक ब्लॉक में गई भी थी, लेकिन वहां टीम को कोई छात्र नहीं मिला, जिनसे पूछताछ की जा सके।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ की सूची में जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व सदस्य शहला राशिद का भी नाम है, इसके अलावा मोहित, जी सुरेश, अमन सिन्हा, अर्पणा, शिवानी राजपूत सहित कुल 30 छात्रों से पूछताछ की जाएगी।
उन्होंने बताया कि छात्रों से पूछताछ में जिन छात्रों का नाम सामने आएगा, पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है। पुलिस की टीम को आशा है कि सभी छात्रों से शनिवार तक पूछताछ की जा सकती है, लेकिन अगर कोई छात्र पूछताछ से बच जाता है, तो समय को आगे बढ़ाया जा सकता है।
बता दें कि वर्ष 2016 में नौ फरवरी की शाम आतंकी अफजल गुरू की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें कथित रूप से देशविरोधी नारेबाजी की गई थी। पूरी घटना में पुलिस कन्हैया, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है और मामले की सुनवाई चल रही है।