रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों से पैसे की वसूली के मामले की जांच कर रही CID ने पूछताछ के आधार पर एक बड़े सिंडिकेट से जुड़े कई अहम दावे सामने आने की बात कही है। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के गिरफ्तार मार्केटिंग कर्मचारी अभय कुमार तिवारी ने रिमांड के दौरान पूछताछ में 11वीं और 13वीं JPSC के साक्षात्कार में अभ्यर्थियों को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के लिए रकम वसूले जाने की जानकारी दी है। CID के अनुसार, अभय तिवारी के कथित बयान में प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक लिए जाने का दावा किया गया है।
पूछताछ में कई नाम सामने आने का दावा
जांच एजेंसी के मुताबिक, अभय तिवारी ने कथित तौर पर इस नेटवर्क में JPSC के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव सेवानिवृत्त एल. खियांग्ते, पूर्व सदस्य डा. अजिता भट्टाचार्य, डा. अनिमा हांसदा और डा. जमाल अहमद के नाम लिए हैं। इसके अलावा पतंजलि कोचिंग से जुड़े रवि कुमार, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और अन्य लोगों की भूमिका का भी कथित बयान में उल्लेख होने की बात कही गई है। अभय के अनुसार, कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय कथित तौर पर अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराता था।
सात अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने का दावा
CID के अनुसार, JPSC की तत्कालीन सदस्य अजिता भट्टाचार्य के PA ब्रजराम के माध्यम से सात अभ्यर्थियों के साक्षात्कार में कथित तौर पर नंबर बढ़ाने का सौदा हुआ था। जांच में सामने आए कथित बयान के मुताबिक, प्रत्येक अभ्यर्थी से 15-15 लाख रुपये लिए गए। अभय तिवारी ने कथित तौर पर यह भी बताया कि अलग-अलग अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक रकम पहुंचाने के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जा रहे अन्य साक्ष्यों से की जानी बाकी है।
अभ्यर्थियों के लिए कोड तैयार करने का दावा
TDPL के निदेशक रामवीर सिंह से पूछताछ को लेकर भी CID ने महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने का दावा किया है। एजेंसी के मुताबिक, रामवीर सिंह ने कथित तौर पर बताया कि 11वीं और 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा तथा CDPO परीक्षा के साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के क्रमांक के आधार पर TDPL की ओर से कोड तैयार किए जाते थे। जांच एजेंसी का दावा है कि इन्हीं कोड के आधार पर कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। आरोप के मुताबिक, JPSC के कुछ पदाधिकारी इंटरव्यू में अभ्यर्थियों के कोड को डिकोड कराने के लिए रामवीर सिंह से संपर्क करते थे।
प्रारंभिक परीक्षा से अंतिम चयन तक कथित रेट
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, 11वीं और 13वीं JPSC में प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए भी अलग-अलग रकम तय होने का दावा किया गया है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए कथित तौर पर पांच लाख रुपये, जबकि SC-ST वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए दो से तीन लाख रुपये तक की रकम बताए जाने की बात सामने आई है। वहीं, अंतिम चयन के लिए कथित रकम 60 से 70 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी तक होने का दावा किया गया है। साक्षात्कार से जुड़ी रकम अजिता भट्टाचार्य के PA ब्रजराम के माध्यम से वसूले जाने का आरोप है।
अलग-अलग लोगों के लिए अलग माध्यम का आरोप
जांच में सामने आए कथित बयान के मुताबिक, एल. खियांग्ते के लिए मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से रकम वसूले जाने का दावा किया गया है। वहीं, डा. जमाल अहमद के लिए हजारीबाग के कथित बिचौलियों के सक्रिय होने की बात कही गई है।
CDPO परीक्षा में भी रकम तय होने का दावा
CID की पूछताछ में CDPO परीक्षा को लेकर भी कथित लेन-देन की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। अभय तिवारी के अनुसार, इस परीक्षा में प्रति अभ्यर्थी 10 लाख रुपये तक की रकम तय होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, एक अभ्यर्थी रजक से धर्मेंद्र द्वारा 15 लाख रुपये और काजल भारती से ब्रजराम द्वारा 10 लाख रुपये लिए जाने का दावा भी पूछताछ में सामने आया है। इसके अलावा प्रमोद कुमार पाठक के लिए ITI के प्रोजेक्ट मैनेजर कृष्णा के माध्यम से कथित तौर पर सौदा कराने की बात कही गई है। CID अब इन कथित बयानों की स्वतंत्र साक्ष्यों से जांच कर रही है। जांच में दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल अहम होगी। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो JPSC की परीक्षाओं में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।