जल स्तर गिरा, सूखे तालाब और हैंडपंप

जांजगीर । गर्मी बढऩे के साथ ही पानी की समस्या हर ओर विकराल होने लगी है। लोगों की लापरवाही और शासन प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण जल स्तर साल दर साल गिरता जा रहा है।

Update: 2017-05-08 04:33 GMT

 जलस्त्रोतों को सुरक्षित रखने ध्यान नहीं
पेयजल संकट गहराया, बोर खनन पर लगा प्रतिबंध

जांजगीर । गर्मी बढऩे के साथ ही पानी की समस्या हर ओर विकराल होने लगी है। लोगों की लापरवाही और शासन प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण जल स्तर साल दर साल गिरता जा रहा है। इसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। गर्मी के दस्तक देेते ही अधिकांश तालाब व कुएं सूखने लगे थे। बिगड़े हैंडपंप के कारण लोगों के सामने पेयजल की समस्या शुरु हो गई थी। अब गर्मी पूरे शबाब पर है और पेयजल के साथ ही निस्तारी की समस्या हर ओर दिख रही है। गांवों में तालाब सूख चुके हैं वहीं शहरी  क्षेत्र में बोर जवाब दे गए हैं। शासन-प्रशासन के उदासनी रवैये की वजह से जलश्रोतों को संरक्षित रखने कोई कारगर उपाय अब तक नहीं किए जा सके हैं। जिससे लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले सालों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
बरसात के दिनों में पानी को संरक्षित नहीं रखने का खामियाजा गर्मी के दिनों में अब लोगों को भुगतना पड़ रहा है। गांवों के अधिकांश तालाब सूख गए हैं। जिससे लोगों के सामने पानी की समस्या हो रही है। निस्तारी के साथ ही पेयजल के लिए उन्हें दूर-दराज जाना पड़ रहा है। इसी तरह शहर में जहां एक दर्जन तालाब है, जिसमें से आधे से ज्यादा तालाब पूरी तरह सूख गए हैं। कई तालाब गंदगी से अटे पड़े हैं इसके बावजूद इन तालाबों को सहेजने न तो नगरपालिका अलर्ट हो रहा है और न ही शासन-प्रशासन इसकी सुध लेने में रुची दिखा रही है। जिससे तालाब का उपयोग नहीं हो पा रहा है। नगर में कुछ साल पहले तक आधा दर्जन सार्वजनिक कुएं भी थे जो देख रेख के अभाव में या तो गंदगी से सराबोर है या फिर सूख चुके हैं। विडम्बना तो यह है कि सरोवर धरोवर योजना के तहत भी इनको सुरक्षित व जल को संरक्षित रखने कोई आज पर्यंत कोई ठोस पहल नहीं की जा सकी  है। जिससे जलश्रोतों में पानी संरक्षित नहीं हो पा रहे हैं। जो भविष्य में एक जटिल समस्या बन जाएगी।
हैंडपंपों से निकल रही हवा
जिले में करीब 12 हजार हैंडपंप हैं, जिसमें से लगभग 500 बिगड़े पड़े हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या हो रही है। एक तरफ सरकार लोगों को मूलभूत सुविधाओं के तहत पानी की सुविधा उपलब्ध करानेे नल जल योजना, भागरथी योजना सहित कइ्र्र प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप बिगडऩे के बाद तीन चार माह तक उसे सुधारने कोई ठोस पहल नहीं की जाती। जिससे लोगों को पानी के लिए काफी जद्देजहद करना पड़ता है। विडम्बना तो यह है कि  हैंडपंप को ठीक करने विभागीय अमला कभी कभी नजर आते हैं। जिससे कई गांवों में तीन-चार  माह तक पानी की समस्या बनी रहती है। ऐसे में महिलाओं को काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है।
पानी टंकी से भी आपूर्ति नहीं
पेयजल आपूर्ति के लिए बकायदा लाखों की लागत से गांव- गांव में पानी टंकी का निर्माण किया गया है लेकिन कई टंकी से पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। अधिकांश गांव में पानी टंकी शुरू होने के कुछ दिनों बाद से ही तरह- तरह के फाल्ट आने के कारण सप्लाई बंद है। कहीं पंप की खराबी तो कहीं टंकी में लिकेज के कारण यह महज सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।  जिला मुख्यालय जांजगीर में भी घरोंघर नल के माध्यम से पानी पहुंचाने बनवाई गई पानी की टंकी कई साल से बंद है। हसदेव जल आवर्धन योजना के तहत बनी ये टंकी प्रशासन की नाकामी को उजागर कर रही है।
जल स्तर गिरने का कारण
पीएचई के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र में बड़ी तादात में रबी फसल की बोनी की जाती है। इससे पानी की खपत ज्यादा होती है। मालखरौदा, जैजैपुर और सक्ती क्षेत्र में ट्यूबवेल से पानी लेकर खेती की जाती है, जिससे भूजल का अधिक दोहन होता है। लगातार बढ़ती जनसंख्या से पानी की खपत भी बढ़ रही है। पानी का ज्यादा उपयोग होने के कारण जलस्तर गिर जाता है। इसके अलावा कांक्रीट सडक़ें और पेड़ों की कटाई भी जलस्तर गिराने में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में वाटर हार्वेस्टिंग को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इन सभी कारणों से जलस्तर गिरना लाजमी है।
जल स्तर बढ़ाने के उपाय
जल स्तर मेंटेन करने शासन अब गंभीर होते दिखाई दे रही है। रिचार्जिंग योजना के तहत गांव-गांव में तालाब गहरीकरण कर जल स्तर सुधारने का प्रयास किया जाता है। नदी-नालों में स्टाप डेम का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन पानी की बचत के लिए लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा। जरूरत के हिसाब से पानी का उपयोग करने गंभीर होना होगा। गर्मी के मौसम में ऐसे फसल लेने चाहिए जिसे सिंचाई के लिए कम पानी लगे।
नहर बंद होने से बिगड़े हालात
जिले में गिरते जलस्तर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सका है कि जिला प्रशासन ने बोर खुदाई पर प्रतिबंध लगा दिया है। शहर के अधिकांश बोर जवाब दे चुके हैं। पानी की मारामारी को देखते हुए नहर में अप्रैल के प्रथम सप्ताह में पानी छोड़ा गया था। नहर में पानी चलने से आसपास का जलस्तर मेंटेन हुआ और घरों के बोर में गुंजाईश के लिए पानी आने लगा था। बहुत से लोग नहर से निस्तारी भी कर रहे थे। सप्ताहभर पहले नहर में पानी की धार बंद हो चुकी है। इसके साथ ही हालात बिगडऩे लगे हैं। बोर अब फिर से बेकाम हो गए हैं। टैंकर से मोहल्लों में पेयजल की सप्लाई नगरपालिका द्वारा की जा रही है।

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