रेलवे स्टेशन में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
जांजगीर ! हावड़ा मुम्बई रेल मार्ग के बीच स्थित स्टेशन जांजगीर-नैला में यात्री सुविधा का अभाव के चलते लोगों को आये दिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों की मांग भी रेलवे प्रशासन ने की अनसुनी
जांजगीर ! हावड़ा मुम्बई रेल मार्ग के बीच स्थित स्टेशन जांजगीर-नैला में यात्री सुविधा का अभाव के चलते लोगों को आये दिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं रेल प्रशासन समस्याओं सुधार करने के बजाय मौन लगाये बैठे है। जिसका खामयाजा आम यात्रियों को देखने को मिल रहा है। साथ ही स्टेशन में एक फुट ओव्हरब्रिज होने के चलते यात्रियों को प्लेटफार्मों में आने-जाने में परेशानी होती है। एक ओर यात्रियों के बैठने के लिए बेन्च की कमी है वहीं दूसरी ओर माडल स्टेशन के प्लेटफार्मो में शेड की कमी है इसके चलते यात्रियों को चिलचिलाती धूप में खड़े होकर गतंव्य के लिए ट्रेन का इंतजार करना पड़त है। कहने को तो यह स्टेशन मॉडल स्टेशन है मगर सुविधाएं अभी भी यहां पैसेन्जर हाल्ट स्टेशन जैसी है। जिसके लिए शहर के जनप्रतिनिधियों उदासीनता और रेलवे विभाग द्वारा लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जा रहा है।
विदित हो कि हावड़ा मुम्बई रेल मार्ग के बीच स्थित नगर जांजगीर- नैला रेल्वे स्टेशन जिला मुख्यालय का मुख्य स्टेशन है। जिसमें प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों का आना-जाना होता है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा दिया गया है, परन्तु रेलवे की उदासीनता का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। रेलवे को स्टेशन से हर माह लाखों रूपए की आय होती है मगर प्रशासन द्वारा यात्रियों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है स्टेशन में अब तक मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां के सभी प्लेटफार्म में न तो लोगों को छाया देने के लिए पर्याप्त शेड लगे हैं और न ही यात्रियों के बैठने की कोई पर्याप्त व्यवस्था है। स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों को पर्याप्त शेड न होने के कारण धूप में खड़े होकर ट्रेन का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ता है। हालांकि यात्रियों द्वारा शेड के अभाव में धूप से बचने के लिए प्लेटफार्म नं 1, 2 व 3 में लगे कुछ पेड़ों के नीचे खड़े होकर अपनी ट्रेनों का इंतजार किया जाता है मगर प्लेटफार्म नं 4 में केवल एक ही शेड लगा है जबकि चाम्पा, कोरबा की ओर जाने वाली प्राय: सभी ट्रेनों को इसी प्लेटफार्म में रोका जाता है। ऐसे में प्लेटफार्म नं 4 से यात्रा करने वाले यात्रियों को शेड व कुर्सियों के अभाव में अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रेलवे द्वारा यहां कई सालों से स्टेशन का विकास करने की बात कही जा रही मगर स्टेशन के विकास की गति बहुत धीमी है। मॉडल स्टेशन के नए भवन में पेनल रूम तक नहीं बना है। जिला मुख्यालय होने के चलते बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। वहीं एक ओर ट्रेन के अभाव में लोगों को परेशानियों को सामना करना पड़ता है। हालांकि कुछ वर्ष पहले दक्षिण पूर्व मध्यम रेलवे द्वारा नैला रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा दिया गया है। दर्जा मिलने के कुछ वर्ष बाद ही मॉडल स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू किया गया। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी अब तक मूलभूत सुविधाओं के लिए यात्रियों को भटकना पड़ रहा है। यहां कई एक्सप्रेस व जनशताब्दी के अलावा लोकल ट्रेनों का स्टापेज है। इन ट्रेनों के माध्यम से रोजाना हजारों की संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है, लेकिन यात्री सुविधा को लेकर रेल प्रबंधन के उदासीन रवैये के कारण यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शहरवासियों को ज्यादातर लंबे सफर करने वाले मुसाफिरों को चांपा, बिलासपुर जाकर ट्रेन पकडऩे को मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि पिछले कई वर्षों से शहरवासियों द्वारा लम्बी दूरी चलने वाली ट्रेनों की स्टापेज की मांग की जा रही है, लेकिन शहर के जनप्रतिनिधियों सहित रेलवे विभाग द्वारा लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया जा रहा है।
प्लेटफार्म पार करने एफओबी नहीं
जिला मुख्यालय के रेल्वे स्टेशन जहां प्लेटफार्म क्रमांक 01 में यात्री गाडिय़ों के बजाय अक्सर मालगाड़ी खड़ी रहती है। वहीं अन्य प्लेटफार्म में यात्री गाडिय़ां खड़ी होती है। जहां सीढ़ी पार कर जाना दिव्यांगों व उम्र दराज लोगों के लिए अत्यंत दुष्कर होता है। साथ ही इस दौरान अक्सर इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है। ऐसे में मॉडल स्टेशन में इलेक्ट्रानिक फुट ओव्हर की आवश्यकता बनी हुई है।