सोनम वांगचुक का केंद्र पर आरोप, बोले- लद्दाख के लोगों से किया वादा निभाने में पीछे हट रही सरकार

सोनम वांगचुक ने दोहराया कि लद्दाख के लिए विधायिका वाले केंद्रशासित प्रदेश और संवैधानिक सुरक्षा उपायों से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा। उनके मुताबिक, क्षेत्र के लोगों को अपने शासन और भविष्य से जुड़े फैसलों में प्रभावी भागीदारी मिलनी चाहिए।;

Update: 2026-10-23 08:45 GMT

नई दिल्ली: लद्दाख को पूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार और संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लद्दाख के आंदोलनकारी संगठनों के साथ मई में बनी सहमति से पीछे हटती दिखाई दे रही है। वांगचुक के मुताबिक, 22 अक्टूबर को प्रस्तावित वार्ता नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को निराशा हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इस रुख से केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच विश्वास का संकट गहरा सकता है। दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग लंबे समय से अपने राजनीतिक अधिकारों, जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। ऐसे में बातचीत की प्रक्रिया में देरी उनकी चिंताओं को और बढ़ा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह आंदोलनकारी संगठनों के साथ हुई बातचीत को गंभीरता से आगे बढ़ाए और क्षेत्र की मांगों पर ठोस निर्णय ले।

22 अक्टूबर की बैठक क्यों थी अहम?

वांगचुक के अनुसार, लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के प्रतिनिधियों ने 22 अक्टूबर को होने वाली बैठक के लिए तैयारी की थी। इससे पहले 15 अक्टूबर को लेह में हुई बैठक के दौरान दोनों संगठनों ने गृह मंत्रालय को अपनी मांगों से संबंधित मसौदा सौंपा था। वांगचुक ने बताया कि मंत्रालय की ओर से भी एक प्रस्ताव दिया गया था। योजना के मुताबिक, दोनों पक्षों के मसौदों का बिंदुवार अध्ययन करने के बाद अगली बैठक में उन मुद्दों पर चर्चा होनी थी, जिन पर सहमति नहीं बन पाई थी। आंदोलनकारी संगठनों को उम्मीद थी कि इस बातचीत से समाधान की दिशा में प्रगति होगी। हालांकि, प्रस्तावित वार्ता नहीं होने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा। वांगचुक ने इसे केवल एक बैठक का मामला नहीं, बल्कि लद्दाख के लोगों के भरोसे से जुड़ा विषय बताया। उनका कहना है कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

विधायिका वाले केंद्रशासित प्रदेश की मांग

सोनम वांगचुक ने दोहराया कि लद्दाख के लिए विधायिका वाले केंद्रशासित प्रदेश और संवैधानिक सुरक्षा उपायों से कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा। उनके मुताबिक, क्षेत्र के लोगों को अपने शासन और भविष्य से जुड़े फैसलों में प्रभावी भागीदारी मिलनी चाहिए। लद्दाख के आंदोलनकारी संगठनों की प्रमुख मांगों में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक अधिकारों और क्षेत्र की विशिष्ट पहचान की रक्षा से जुड़े उपाय शामिल हैं। वांगचुक ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में उपराज्यपाल के पास व्यापक अधिकार हैं और स्थानीय निर्वाचित संस्थाओं की भूमिका सीमित हो जाती है। उन्होंने जिला परिषदों की शक्तियों को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, स्थानीय संस्थाओं को अधिक अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि विकास, प्रशासन और संसाधनों से जुड़े फैसलों में क्षेत्र के निवासियों की आवाज प्रभावी तरीके से शामिल हो सके।

जमीन, संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की चिंता

वांगचुक ने लद्दाख की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि लद्दाख की करीब 90 प्रतिशत आबादी जनजातीय समुदायों से संबंधित है। ऐसे में स्थानीय लोगों की सामाजिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जानी चाहिए। आंदोलनकारी संगठनों की चिंता है कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अभाव में जमीन, संसाधनों और स्थानीय हितों से जुड़े फैसलों पर बाहरी प्रभाव बढ़ सकता है।

चीन सीमा का हवाला देकर लोकतांत्रिक अधिकारों पर जोर

वांगचुक ने लद्दाख की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि चीन के साथ संवेदनशील सीमा साझा करने वाले इस क्षेत्र को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा और विकास के लिए स्थानीय लोगों का विश्वास तथा भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल, केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की अगली तारीख तथा लंबित मांगों पर प्रगति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आंदोलनकारी संगठनों की मांग है कि वार्ता को जल्द बहाल किया जाए और राजनीतिक अधिकारों तथा संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस समाधान निकाला जाए।

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