जम्मू : भारतीय सेना के एक मेजर की पत्नी पर चीन के लिए जासूसी करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील विषयों पर जानकारी साझा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, महिला रक्षा, विदेश नीति और सीमावर्ती क्षेत्रों से संबंधित विषयों पर शोध पत्र तैयार करती थी। आरोप है कि इन दस्तावेजों के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारियां एक चीनी संपर्क तक पहुंचाई जा रही थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि महिला कथित तौर पर सूचनाएं जुटाने और शोध सामग्री तैयार करने के लिए ChatGPT तथा Claude जैसे AI टूल का इस्तेमाल करती थी। हालांकि, एजेंसियां अभी यह पता लगा रही हैं कि संबंधित दस्तावेजों में वास्तव में कोई गोपनीय जानकारी थी या वे सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित थे।
जम्मू रेलवे स्टेशन पर रोकी गई महिला
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, खुफिया जानकारी मिलने के बाद एक संयुक्त टीम ने महिला को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर रोका। उस समय वह पठानकोट जाने के लिए ट्रेन में सवार होने की तैयारी कर रही थी। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए सैन्य क्षेत्र में ले जाया गया। मामले की जांच आगे बढ़ने पर जम्मू के गांधीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने मामले में आपराधिक साजिश और देश की संप्रभुता के खिलाफ अपराध से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं लगाई हैं। महिला का मोबाइल फोन भी जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियां फोन में मौजूद दस्तावेजों, संदेशों और संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
सीमावर्ती इलाकों और रक्षा परियोजनाओं पर शोध का आरोप
जांच अधिकारियों का दावा है कि महिला को कई संवेदनशील रणनीतिक विषयों पर शोध पत्र तैयार करने का काम दिया गया था। इनमें जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) की स्थिति, अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाएं और मानवरहित विमानों की तैनाती जैसे विषय शामिल बताए जा रहे हैं। मोबाइल फोन से शुरुआती जांच में मिले दस्तावेजों में भारत और इटली के बीच रक्षा बैठक, भारतीय सेना प्रमुख की अमेरिका यात्रा, भारत-रूस रक्षा समझौते तथा भारत-चीन संबंधों से जुड़ी सामग्री होने की बात कही गई है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश की कलई-दो और कमला जलविद्युत परियोजनाओं, सेना की कोल्ड स्टार्ट रणनीति, भारत-सेशेल्स संबंधों और असम में चल रही परियोजनाओं से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसियां यह निर्धारित करने की कोशिश कर रही हैं कि इन शोध पत्रों में केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियां थीं या किसी गोपनीय सैन्य अथवा रणनीतिक सूचना को भी शामिल किया गया था। दस्तावेजों की प्रकृति और उन्हें किसके साथ साझा किया गया, यह जांच के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
ChatGPT और Claude के इस्तेमाल की भी पड़ताल
इस मामले में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टूल के कथित इस्तेमाल ने जांच का एक नया पहलू सामने रखा है। अधिकारियों के अनुसार, महिला इन टूल की मदद से विभिन्न विषयों पर सामग्री जुटाती और शोध पत्र तैयार करती थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन प्लेटफॉर्म का उपयोग किस तरह किया गया और तैयार सामग्री में किसी प्रतिबंधित सूचना का समावेश था या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, AI टूल से सार्वजनिक जानकारी का सार तैयार करना अपने आप में जासूसी का प्रमाण नहीं है। मामले में अहम सवाल यह होगा कि क्या कोई गोपनीय जानकारी हासिल की गई, साझा की गई या राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से उसका इस्तेमाल हुआ।
संयुक्त राष्ट्र में प्रशिक्षण और विदेशी संपर्कों की जांच
तेलंगाना की रहने वाली महिला उच्च शिक्षित बताई जा रही है। उसने वर्ष 2021 में बेंगलुरु के एक विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी। वर्ष 2022 में उसने जिनेवा से यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय शासन विषय में भी स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2023 में उसने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े सूचना प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इसके अतिरिक्त, उसने नई दिल्ली स्थित एक रक्षा अध्ययन संस्थान के साथ ऑनलाइन प्रशिक्षण भी लिया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रशिक्षण के दौरान महिला कुछ विदेशी नागरिकों के संपर्क में आई थी। इनमें एक चीनी नागरिक भी शामिल बताया गया है, जिसके साथ वह WhatsApp के माध्यम से संपर्क में थी। वर्ष 2024 में मलेशिया के एक व्यक्ति के साथ उसके संपर्कों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, किसी विदेशी नागरिक से संपर्क होना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है।
महिला का दावा, सार्वजनिक स्रोतों से जुटाई थी जानकारी
पूछताछ के दौरान महिला ने कथित तौर पर दावा किया कि उसके शोध पत्र सार्वजनिक स्रोतों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित थे। जांच एजेंसियां अब उसके दावे की पुष्टि के लिए डिजिटल साक्ष्यों, दस्तावेजों और संपर्कों का विश्लेषण कर रही हैं। फिलहाल जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि महिला ने किसी संवेदनशील सूचना को जानबूझकर विदेशी संपर्कों तक पहुंचाया था या नहीं। फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण होगा।