श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद शुरू हुई नाराजगी अब खुलकर बगावत में बदलती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार और पार्टी संगठन के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। पार्टी के नाराज विधायकों ने एकजुट होकर नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रख दी हैं। असंतुष्ट गुट ने रविवार को दावा किया कि उनके साथ 18 नहीं, बल्कि 25 विधायक हैं और सभी एकजुट हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि वे अपने रुख से पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस बीच, ईदगाह से विधायक मुबारक गुल ने भी पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम पर चुप्पी तोड़ने का संकेत दिया है। वह 4 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। नेकां के भीतर बढ़ते इस विवाद ने उमर अब्दुल्ला सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही पार्टी में असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। कई वरिष्ठ नेता और विधायक मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं।
मुबारक गुल की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल
रविवार को श्रीनगर के ईदगाह इलाके में विधायक मुबारक गुल के आवास पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें ब्लॉक पदाधिकारियों, हल्का प्रतिनिधियों, मोहल्ला समितियों और विभिन्न अधीनस्थ समितियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करने के साथ कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की गई। मुबारक गुल ने पदाधिकारियों से स्थानीय जनता के संपर्क में रहने और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने बेरोजगारी, नागरिक सुविधाओं, बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाने पर जोर दिया। गुल ने पार्टी के शांति और सतत विकास के एजेंडे को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की बात भी कही। हालांकि, इस बैठक को पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष और सांगठनिक बदलाव की मांगों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
4 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोलेंगे मुबारक गुल?
इस पूरे घटनाक्रम में मुबारक गुल की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वह 4 नवंबर को मीडिया के सामने पार्टी के भीतर हुए घटनाक्रम पर अपनी बात रख सकते हैं। इससे पहले 31 अक्टूबर को उन्होंने कहा था कि अब तक उन्होंने चुप्पी बनाए रखी है, लेकिन सही समय आने पर वह सभी पहलुओं को सार्वजनिक करेंगे। ऐसे में उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि वह मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हुए घटनाक्रम और पार्टी के भीतर सांगठनिक फैसलों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं। दरअसल, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुबारक गुल को पहले जल्दबाजी में पार्टी महासचिव नियुक्त किया गया था। इसके बाद नया आदेश जारी कर अली मोहम्मद सागर को महासचिव का कार्यभार संभालने के लिए कहा गया। इस घटनाक्रम ने पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया।
'हम 25 विधायक हैं, 18 नहीं', असंतुष्ट गुट का दावा
नेकां के नाराज विधायकों ने रविवार को अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कहा कि उनके समूह में 25 विधायक हैं, न कि 18। उन्होंने कहा कि सभी विधायक एक साथ हैं और पार्टी में जरूरी बदलावों की मांग पर कायम हैं। असंतुष्ट गुट ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी का कारण मंत्री पद या सरकार में किसी दूसरे पद की मांग नहीं है। उनका दावा है कि वे पार्टी की वास्तविक विचारधारा और कार्यकर्ताओं की आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। गुट के दो विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ समझौते की संभावनाओं को भी खारिज किया। उनका कहना है कि जब तक पार्टी और सरकार में सलाहकारों तथा सांसदों का प्रभाव बना रहेगा, तब तक किसी समझौते की गुंजाइश नहीं है।
'ऐसे माहौल से बेहतर है सरकार गिर जाए'
नाराज विधायकों ने अपनी मांगों का चार्टर पहले ही नेकां अध्यक्ष और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को सौंप दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में उनकी राजनीतिक ताकत और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। असंतुष्ट विधायकों का कहना है कि लगातार अपमान और अनदेखी सहने के बजाय सरकार का गिर जाना बेहतर होगा। उन्होंने उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि कुछ मध्यस्थ उनके साथ बातचीत कर रहे हैं। गुट ने साफ कहा कि भविष्य में जब भी बैठक होगी, सभी 25 विधायक एक साथ शामिल होंगे। इससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव और बढ़ गया है।
उमर अब्दुल्ला के सामने दोहरी चुनौती
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर बढ़ता असंतोष मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए दोहरी चुनौती बन गया है। एक तरफ उन्हें सरकार की स्थिरता बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के नाराज विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना भी जरूरी है। अब सभी की निगाहें 4 नवंबर को मुबारक गुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस और असंतुष्ट विधायकों की अगली रणनीति पर टिकी हैं।