जेटली लंदन में भारतीय शिक्षण संस्थानों का अपमान किया है, टिप्पणी के लिए माफी मांगें : कांग्रेस

नई दिल्ली ! कांग्रेस ने रामजस कॉलेज में हुई हिंसा का संदर्भ देते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) में अपनी टिप्पणी से भारतीय शिक्षण संस

Update: 2017-02-27 08:40 GMT

नई दिल्ली !   कांग्रेस ने रामजस कॉलेज में हुई हिंसा का संदर्भ देते हुए सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) में अपनी टिप्पणी से भारतीय शिक्षण संस्थानों का अपमान किया है और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। जेटली ने एलएसई में एक भाषण में कहा था कि भारत के कुछ शैक्षणिक परिसरों में हिंसक गठजोड़ चल रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम ने भी जेटली पर निशाना साधा है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में ट्वीट कर पूछा, "जब सन् 1975 में जेटली दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) के अध्यक्ष थे, तब क्या वह 'हिंसक गठजोड़' की अध्यक्षता कर रहे थे।"

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "वित्तमंत्री लंदन गए। एलएसई में उन्होंने कहा कि भारत के विश्वविद्यालय परिसरों में एक हिंसक गठजोड़ चल रहा है।"

उन्होंने कहा, "उन्होंने भारतीय शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा इस क्षेत्र के अन्य सदस्यों का अपमान किया है। उन्हें (जेटली) भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ इस्तेमाल की गई अपनी भाषा के लिए माफी मांगनी चाहिए, वह भी विदेशी सरजमीं पर।"

दरअसल, एलएसई में शनिवार को एक चर्चा में जेटली ने कहा, "हिंसा कोई तरीका नहीं है, किसी भी समूह को हिंसा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, हिंसा का एक गठजोड़ है, जो चल रहा है। कुछ विश्वविद्यालय परिसरों में अलगाववादी तथा वामपंथी एक ही भाषा बोल रहे हैं। इसलिए उन्हें भी चाहिए कि अलग मत रखने वालों को भी बोलने दें, प्रतिकार करने दें।"

जेटली की यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) तथा वाम मोर्चा समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं के बीच 22 फरवरी को हुई झड़प के बाद आई है।

तिवारी ने कहा कि जेटली की टिप्पणी यह दर्शाती है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर तक यह भय समाया हुआ है कि एक स्वाभाविक हिंसक गठजोड़ आ रहा है।

उन्होंने कहा, "फासीवादी सिद्धांतों को धूल में मिलाने के लिए एक स्वाभाविक हिंसक गठबंधन निश्चित तौर पर उभर कर आएगा, जो भाजपा के लिए स्वाभाविक है। इस गठबंधन ने उनकी असहिष्णुता को चुनौती दी है। साथ ही इसने उनके थोपने वाले विचारों के अधिकारों को भी चुनौती दी है, जिसके कारण सरकार पीड़ोन्मादी (दूसरों की पीड़ा का आनंद उठाने वाला) बन गई है।"

कांग्रेस नेता ने कहा, "रामजस कॉलेज में जो हिंसा हुई, पूरी तरह घृणास्पद है। सबसे ज्यादा अचंभित करने वाली बात हिंसा को न्यायोचित ठहराने के लिए सरकार के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा किया गया प्रयास है।"

उन्होंने कहा, "भारत में शत्रुता पैदा करने या अलगाववाद पैदा करने वालों की वकालत करने वालों का समर्थन करने का किसी को अधिकार नहीं है।"

मोदी सरकार पर संघ परिवार के साथ मिलकर लोकतंत्र पर हमला करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि रामजस कॉलेज में विद्यार्थियों व शिक्षकों पर कथित तौर पर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया अत्याचार दक्षिणपंथी ताकतों के समन्वित प्रयासों का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, "यह कोई अकेली घटना (रामजस) नहीं है। जब से यह सरकार सत्ता में आई है, विचारों को दक्षिणपंथ की तरफ मोड़ने का प्रयास कर रही है।"

तिवारी ने कहा, "इस तरह का अत्याचार तथा हिंसा पूरे देश में हो रही है, जिसने उन मौलिक विचारों को चुनौती दी है, जिसपर भारत का संविधान टिका हुआ है।"

उन्होंने कहा, "इसलिए, अब समय आ गया है कि सभी प्रगतिशील, बहुलवादी तथा देशभक्त ताकतें साथ आएं तथा संघ परिवार के तत्वों द्वारा भारतीय लोकतंत्र पर निरंतर किए जा रहे हमलों के खिलाफ खड़े हों। लोकतंत्र पर इन हमलों का केंद्र सरकार, यहां तक कि प्रधानमंत्री भी समर्थन कर रहे हैं।"

इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा कि मोदी ट्विटर पर जहर उगलने वाले, महिला विरोधी, हत्या की धमकी देने वाले ट्रोल अकाउंट को फॉलो करते हैं।

राष्ट्रद्रोह के आरोप में पिछले साल जेल जा चुके जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र उमर खालिद को रामजस कॉलेज में 'विरोध की संस्कृति' नामक साहित्यिक संगोष्ठी में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित करने को लेकर झड़प हुई थी।

इस बवाल को तब नई हवा मिल गई, जब लेडी श्रीराम कॉलेज की गुरमेहर कौर नामक छात्रा ने एबीवीपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक अभियान शुरू किया।

कौर ने एक तख्ती लिए सोशल मीडिया पर स्टूडेंट्सअगेंस्टएबीवीपी हैशटैग के साथ एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें लिखा, "मैं दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हूं। मैं एबीवीपी से नहीं डरती। मैं अकेली नहीं हूं। भारत का हर छात्र मेरे साथ है।"

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