कुवैत बेस हमले पर अमेरिका के घायल सैनिकों ने उगल दी सच्चाई, कहा-ईरान ने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया

CBS को दिए इंटरव्यू में एक सैनिक ने बताया कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि ईरान ने पूरी रणनीति के साथ इसे अंजाम दिया था। सैनिक के मुताबिक, “हम जानते थे कि यह बेस निशाने पर हो सकता है। खुफिया रिपोर्ट में पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।”

Update: 2026-04-10 10:15 GMT

वॉशिंगटन। ईरान के साथ संघर्षविराम (सीजफायर) के बाद अब अमेरिकी सैन्य तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं। कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर मार्च 2026 में हुए हमले से बचे सैनिकों ने अमेरिकी मीडिया नेटवर्क CBS को दिए इंटरव्यू में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इन सैनिकों ने न सिर्फ हमले की गंभीरता को स्वीकार किया, बल्कि ट्रंप प्रशासन के दावों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

हमले में 6 सैनिकों की मौत, कई घायल

मार्च 2026 में कुवैत के एक अमेरिकी बेस पर ईरान ने ड्रोन हमला किया था, जिसमें 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी और करीब 20 सैनिक घायल हुए थे। यह हमला उस समय हुआ था जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर था। हालांकि, उस वक्त अमेरिकी प्रशासन ने इस हमले को कमतर बताते हुए कहा था कि यह एक सीमित नुकसान वाला हादसा था और बेस पूरी तरह सुरक्षित था। लेकिन अब सामने आए सैनिकों के बयान इस दावे से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं।

“ईरान पूरी तैयारी के साथ आया था”

CBS को दिए इंटरव्यू में एक सैनिक ने बताया कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि ईरान ने पूरी रणनीति के साथ इसे अंजाम दिया था। सैनिक के मुताबिक, “हम जानते थे कि यह बेस निशाने पर हो सकता है। खुफिया रिपोर्ट में पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।” उन्होंने बताया कि जिस दिन हमला हुआ, वे नियमित काम में लगे थे, तभी अचानक शाहेद ड्रोन के जरिए हमला शुरू हो गया। सैनिक ने कहा, हम चाहकर भी नहीं बच पाए। हमला इतना तेज और सटीक था कि 6 साथी मौके पर ही मारे गए।

सरकार के दावों पर उठे सवाल

इस खुलासे का सबसे अहम पहलू यह है कि सैनिकों ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के उस बयान को गलत बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बेस “किलेबंद” था और केवल एक ड्रोन “गलती से” अंदर पहुंच गया था। एक अन्य सैनिक ने CBS से कहा, “किलेबंदी की बात पूरी तरह गलत है। वहां सिर्फ एक साधारण दीवार थी, जो जमीन से होने वाले हमले में ही काम आ सकती थी। हवाई हमले से बचने के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं थी।” सैनिक के मुताबिक, हमले के समय करीब 60 जवान खुले क्षेत्र में मौजूद थे और उनके पास छिपने या बचाव के लिए पर्याप्त साधन नहीं थे।

खुफिया चेतावनी के बावजूद तैयारी नहीं

इंटरव्यू में यह भी सामने आया कि हमले से पहले खुफिया एजेंसियों ने संभावित खतरे की जानकारी दी थी। इसके बावजूद सुरक्षा इंतजामों में कोई खास सुधार नहीं किया गया। एक सैनिक ने कहा, “अगर समय रहते चेतावनी को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद नुकसान कम हो सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”

पूरी तरह तबाह हो चुका है बेस

बताया जा रहा है कि कुवैत के दक्षिणी छोर पर स्थित यह बेस रणनीतिक रूप से बेहद अहम था और ईरान की नजर में पहले से ही था। हमले के बाद यह बेस लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुका है। सैनिकों के मुताबिक, हमले के बाद चारों तरफ आग और तबाही का मंजर था, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए थे।

सीजफायर के बाद सामने आई सच्चाई

विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर के बाद अब सैनिक खुलकर अपनी बात कह पा रहे हैं। युद्ध के दौरान अक्सर ऐसी जानकारियां सार्वजनिक नहीं हो पातीं, लेकिन अब इन खुलासों ने अमेरिकी प्रशासन की पारदर्शिता और सैन्य तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजनीतिक और सैन्य असर संभव

इन बयानों का असर सिर्फ सैन्य स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। ट्रंप प्रशासन पर पहले से ही कई फैसलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं, और अब यह मामला उन विवादों को और हवा दे सकता है। कुवैत बेस पर हुए हमले को लेकर सामने आए ये खुलासे न केवल युद्ध की सच्चाई को उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि जमीनी स्तर पर हालात अक्सर सरकारी दावों से काफी अलग होते हैं। अब देखना होगा कि इन आरोपों पर अमेरिकी प्रशासन क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या इस मामले में कोई जांच या जवाबदेही तय की जाती है।

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