अमेरिका में 2 लाख भारतीय मूल के वोटरों के नाम कटने का दावा, मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप की बढ़ी चुनौती

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार वर्षीय कार्यकाल के बीच में होते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है। रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखना महत्वपूर्ण है।;

Update: 2026-10-09 09:22 GMT

वॉशिंगटन: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाता सूची की जांच को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले 26 राज्यों में करीब 2 लाख भारतीय मूल के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम वास्तव में हटाए गए हैं, तो इसका असर कुछ राज्यों में चुनावी मुकाबले पर पड़ सकता है। भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा परंपरागत रूप से डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करता रहा है। ऐसे में यह मुद्दा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

भारतीय मूल के मतदाताओं पर क्यों टिकी निगाहें?

अमेरिका में करीब 21 लाख भारतीय मूल के मतदाता होने का दावा किया गया है। वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, लगभग 65 प्रतिशत भारतीय अमेरिकी मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस का समर्थन किया था। इसी पृष्ठभूमि में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की खबर ने चुनावी निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी मतदाता का नाम सूची से हटने के दावे और वास्तव में किसी योग्य मतदाता को मतदान से वंचित किए जाने के बीच अंतर है। नाम हटाने के कारणों, संबंधित राज्यों के रिकॉर्ड और प्रभावित मतदाताओं की पात्रता की पुष्टि के बिना इसके राजनीतिक प्रभाव का सटीक आकलन करना संभव नहीं है।

भारत की SIR और अमेरिकी प्रक्रिया में अंतर

भारत में निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के माध्यम से मतदाता सूचियों की जांच करता है। इस प्रक्रिया में मृत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य अपात्र नामों की पहचान करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, सूची से नाम हटने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति विदेशी नागरिक है या उसने गलत तरीके से मतदान का अधिकार हासिल किया था। अमेरिका में भारत की तरह एक केंद्रीय निर्वाचन आयोग नहीं है। वहां चुनावों के संचालन और मतदाता पंजीकरण की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों के पास होती है। इसलिए मतदाता सूची की जांच, पहचान संबंधी दस्तावेजों और नाम हटाने की प्रक्रिया के नियम अलग-अलग हो सकते हैं।

ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट से रिपब्लिकन चिंतित

मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार में ट्रंप से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों ने अपनी वेबसाइटों से ट्रंप और उनके 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के उल्लेख को भी कम किया है। AP-NORC सर्वे के मुताबिक, करीब 30 प्रतिशत अमेरिकी ट्रंप के कामकाज से संतुष्ट हैं। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर उनकी स्वीकृति दर 26 प्रतिशत और महंगाई से निपटने के मामले में 17 प्रतिशत बताई गई है। बढ़ती कीमतों को लेकर भी बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक प्रशासन की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं।

'सेव अमेरिका एक्ट' को लेकर विवाद

ट्रंप प्रशासन मतदाता पंजीकरण और पहचान की जांच सख्त करने की वकालत कर रहा है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रपति 'सेव अमेरिका एक्ट' का समर्थन कर रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए अमेरिकी नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज, जैसे पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र, प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो सकती है। मतदान के दौरान पहचान सत्यापन के नियमों को भी सख्त करने का प्रस्ताव है। समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा बढ़ेगी और अपात्र लोगों के पंजीकरण को रोका जा सकेगा। वहीं, विरोधियों का तर्क है कि दस्तावेजों की अनिवार्यता उन योग्य अमेरिकी नागरिकों के लिए भी मुश्किल पैदा कर सकती है, जिनके पास आवश्यक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। ट्रंप पहले भी अमेरिकी चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, व्यापक चुनावी धोखाधड़ी के दावों के समर्थन में निर्णायक सबूत सामने नहीं आए हैं। ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस के शोध में भी जांचे गए चुनावों में मतदाता धोखाधड़ी की घटनाएं बेहद कम पाई गई हैं।

कांग्रेस में बहुमत बचाना ट्रंप के लिए अहम

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के चार वर्षीय कार्यकाल के बीच में होते हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है। रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यदि डेमोक्रेटिक पार्टी किसी भी सदन में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए विधेयक पारित कराना और अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना अधिक कठिन हो सकता है। ऐसे में मतदाता पंजीकरण, महंगाई और चुनावी निष्पक्षता जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। 

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