मध्य-पूर्व में तनाव: अमेरिकी दूतावास अलर्ट, नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
काहिरा, अमेरिका के लगभग 10 मध्य-पूर्वी देशों में स्थित दूतावासों ने शनिवार को अमेरिकी नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी और कहा कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो वे वहां से प्रस्थान करने पर विचार करें या जरूरत पड़ने पर जाने के लिए तैयार रहें।;
काहिरा, अमेरिका के लगभग 10 मध्य-पूर्वी देशों में स्थित दूतावासों ने शनिवार को अमेरिकी नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी और कहा कि यदि क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो वे वहां से प्रस्थान करने पर विचार करें या जरूरत पड़ने पर जाने के लिए तैयार रहें।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल, जॉर्डन, इराक, मिस्र, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में अमेरिकी दूतावासों ने अपनी वेबसाइटों पर इसी तरह के सुरक्षा अलर्ट जारी किए हैं।
मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने अमेरिकी नागरिकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। दूतावासों ने कहा कि लोग उड़ानों के रद्द होने, समय-समय पर हवाई क्षेत्र बंद होने और यात्रा में संभावित व्यवधानों के लिए तैयार रहें।
इसके साथ ही, क्षेत्र के बाहर रह रहे अमेरिकी नागरिकों को भी मध्य-पूर्व की यात्रा करने या वहां से होकर गुजरने की अपनी योजनाओं पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की सलाह दी गई है। शनिवार को ईरान की अर्द्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने रिपोर्ट दी कि ईरान ने अपने बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों के जवाब के लिए एक व्यापक योजना तैयार कर ली है।
तस्नीम के अनुसार, एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी मीडिया में ईरान के बुनियादी ढांचे पर अमेरिका और इजरायल द्वारा संभावित हमलों के दावों के मद्देनजर यह योजना बनाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस रणनीति में इजरायल के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और मध्य-पूर्व में अमेरिकी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की तैयारी शामिल है।
ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब कुछ दिनों के विराम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमलों का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है। साथ ही, यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब से जुड़े घटनाक्रमों के बीच लाल सागर क्षेत्र में तनाव का एक नया मोर्चा भी उभरता दिखाई दे रहा है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने तेहरान समेत ईरान के अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों एवं परिसंपत्तियों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई लहरें चलाईं, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी निगरानी और नियंत्रण भी कड़ा कर दिया।