पाकिस्तान में सियासी हलचल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ‘सबसे बड़े घोटाले’ का किया दावा

पत्रकारों से बातचीत में मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान के इतिहास में शायद ही कभी इतना व्यापक भ्रष्टाचार सामने आया हो, जिसमें विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थानों से जुड़े लोग शामिल रहे हों।;

Update: 2026-08-05 06:31 GMT

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उठापटक के संकेत एक बार फिर तेज हो गए हैं। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने दावा किया है कि देश के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला सामने आया है, जिसमें न्यायपालिका, नौकरशाही, राजनीति और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कई प्रभावशाली लोग शामिल हैं। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में नकवी के लगातार बयानों से सत्ता प्रतिष्ठान और नागरिक सरकार के बीच मतभेदों की चर्चा को और बल मिला है।

‘21 वर्षों तक चलता रहा भ्रष्टाचार’

पत्रकारों से बातचीत में मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान के इतिहास में शायद ही कभी इतना व्यापक भ्रष्टाचार सामने आया हो, जिसमें विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थानों से जुड़े लोग शामिल रहे हों। उन्होंने दावा किया कि करीब 21 वर्षों तक रिश्वतखोरी का सिलसिला चलता रहा और कई स्तरों पर लोग इससे लाभ उठाते रहे। नकवी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने न तो कथित घोटाले का विवरण साझा किया और न ही इसमें शामिल व्यक्तियों के नाम बताए।

सेना का उल्लेख नहीं, उठे कई सवाल

नकवी के बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि उन्होंने अपने आरोपों में सेना का कोई उल्लेख नहीं किया। उनका कहना है कि गृह मंत्री के बयान का केंद्र मुख्य रूप से नागरिक प्रशासन, न्यायपालिका और अन्य सरकारी संस्थान रहे। मोहसिन नकवी को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का करीबी माना जाता है। ऐसे में उनके बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

शासन व्यवस्था पर पहले भी उठा चुके हैं सवाल

यह पहला अवसर नहीं है जब नकवी ने पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हों। कुछ दिन पहले आयोजित ‘पाकिस्तान इकोनमिक समिट’ में उन्होंने कहा था कि देश की दशकों पुरानी शासन व्यवस्था अब प्रभावी नहीं रह गई है और वर्तमान ढांचा मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए नई प्रशासनिक इकाइयों या नए प्रांतों के गठन का सुझाव भी दिया था। उस बयान को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा गया था।

सेना ने भी सुधारों का किया समर्थन

गृह मंत्री के प्रशासनिक सुधार संबंधी विचारों को पाकिस्तान की सेना का भी समर्थन मिला था। सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर के महानिदेशक ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि देश की मौजूदा शासन व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है और प्रशासनिक सुधार समय की आवश्यकता हैं। सेना का कहना था कि बेहतर शासन व्यवस्था केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

सत्तारूढ़ दलों की चुप्पी चर्चा में

दिलचस्प बात यह है कि नकवी के हालिया बयानों पर पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टियों पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी—की ओर से अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि गठबंधन सरकार की यह चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि गृह मंत्री के बयान सीधे तौर पर शासन और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं।

विश्लेषकों ने बताए संभावित विकल्प

पाकिस्तान के समाचार पत्र 'फ्राइडे टाइम्स' में प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा गया है कि यदि देश का सत्ता प्रतिष्ठान वास्तव में मौजूदा शासन व्यवस्था को विफल मानता है, तो उसके सामने दो प्रमुख विकल्प हो सकते हैं। पहला, संवैधानिक ढांचे में बड़े बदलाव कर व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वयं लेना, और दूसरा, लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराकर जनता को नया जनादेश देने का अवसर देना।

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