'हम ना होते तो अमेरिकन फ्रेंच बोल रहे होते...', ट्रंप के मुंह पर किंग चार्ल्स का ऐसा जवाब
अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों की गर्मजोशी एक बार फिर व्हाइट हाउस में आयोजित स्टेट डिनर के दौरान देखने को मिली, जब किंग चार्ल्स तृतीय ने अपने संबोधन में हास्य और इतिहास का दिलचस्प मेल पेश किया।;
वॉशिंगटन। अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों की गर्मजोशी एक बार फिर व्हाइट हाउस में आयोजित स्टेट डिनर के दौरान देखने को मिली, जब किंग चार्ल्स तृतीय ने अपने संबोधन में हास्य और इतिहास का दिलचस्प मेल पेश किया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर हल्के-फुल्के अंदाज में तंज कसते हुए कहा कि अगर ब्रिटिश न होते, तो आज अमेरिका में फ्रेंच बोली जा रही होती। चार्ल्स का यह बयान न केवल मेहमानों के चेहरे पर मुस्कान लेकर आया, बल्कि दोनों देशों के साझा इतिहास की भी याद दिला गया।
इतिहास के जरिए दिया जवाब
किंग चार्ल्स का यह बयान दरअसल ट्रम्प के एक पुराने बयान का जवाब था। उन्होंने कहा, “आपने हाल ही में कहा था कि अगर अमेरिका नहीं होता, तो यूरोप के देश जर्मन बोल रहे होते। तो मैं यह कहने की हिम्मत करता हूं कि अगर हम नहीं होते, तो आप लोग फ्रेंच बोल रहे होते।” इस टिप्पणी के पीछे 18वीं सदी का वह दौर छिपा है, जब उत्तरी अमेरिका पर नियंत्रण को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस के बीच संघर्ष हुआ था। अंततः इस संघर्ष में ब्रिटेन की जीत हुई और अमेरिका के बड़े हिस्से पर उसका प्रभाव स्थापित हुआ।
ट्रम्प का दावोस बयान बना संदर्भ
जनवरी में दावोस समिट के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोप और अमेरिका के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो आज यूरोप का नक्शा और वहां की भाषाएं अलग होतीं। उन्होंने कहा था कि जर्मनी और जापान उस समय बेहद शक्तिशाली थे और अगर उन्हें रोका नहीं जाता, तो वे कई देशों पर कब्जा कर सकते थे। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका की भूमिका ने यूरोप की आजादी को बनाए रखने में निर्णायक योगदान दिया।
व्हाइट हाउस के इतिहास पर भी चुटकी
किंग चार्ल्स ने अपने संबोधन में व्हाइट हाउस के इतिहास को भी मजाकिया अंदाज में छुआ। उन्होंने हाल ही में किए गए निर्माण और बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि ईस्ट विंग में काफी ‘रीएडजस्टमेंट’ हो रहे हैं। दरअसल, ट्रम्प प्रशासन ने एक बड़े बॉलरूम के निर्माण के लिए पुराने हिस्से को हटाने की योजना बनाई है। इस पर चार्ल्स ने हंसते हुए कहा, “हमने भी 1814 में व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट डेवलपमेंट की अपनी कोशिश की थी।” यह टिप्पणी 1814 की उस ऐतिहासिक घटना की ओर इशारा करती है, जब ब्रिटिश सैनिकों ने वॉशिंगटन डीसी पर हमला कर व्हाइट हाउस में आग लगा दी थी।
बोस्टन टी पार्टी का जिक्र
चार्ल्स ने अपने भाषण में बोस्टन टी पार्टी का भी उल्लेख किया, जो अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम की एक अहम घटना मानी जाती है। उन्होंने मजाक में कहा कि आज का यह डिनर ‘बोस्टन टी पार्टी’ से कहीं बेहतर है। 1773 में हुई इस घटना में अमेरिकी उपनिवेशों के लोगों ने ब्रिटिश करों के विरोध में चाय की खेप समुद्र में फेंक दी थी। यह घटना बाद में अमेरिका की आजादी की लड़ाई की शुरुआत का प्रतीक बन गई।
ट्रम्प की प्रतिक्रिया: तारीफ और मजाक
जब डोनाल्ड ट्रम्प के बोलने की बारी आई, तो उन्होंने भी उसी हल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने किंग चार्ल्स के भाषण की तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद प्रभावशाली था। ट्रम्प ने मजाक में यह भी कहा कि चार्ल्स ने वह कर दिखाया, जो वह खुद नहीं कर पाए—डेमोक्रेट्स को खड़ा कर तालियां बजवाना। अमेरिका की राजनीति में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच अक्सर तीखा मतभेद देखने को मिलता है, और आमतौर पर डेमोक्रेट्स, ट्रम्प के भाषणों पर खड़े होकर तालियां नहीं बजाते। लेकिन चार्ल्स के संबोधन पर दोनों पक्षों ने एकजुट होकर प्रतिक्रिया दी।
राजनयिक संबंधों की झलक
यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका और ब्रिटेन के बीच मजबूत संबंधों की झलक भी पेश करता है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मतभेद रहे हैं, लेकिन आज वे करीबी सहयोगी हैं। ऐसे आयोजनों में इतिहास को हल्के-फुल्के अंदाज में याद करना न केवल रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे समय के साथ पुराने संघर्ष दोस्ती में बदल जाते हैं।
हास्य के जरिए संदेश
किंग चार्ल्स का यह संबोधन केवल मजाक तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए उन्होंने यह संदेश भी दिया कि इतिहास को समझना और उससे सीख लेना कितना जरूरी है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संवाद और आपसी सम्मान की भूमिका अहम होती है। ट्रम्प और चार्ल्स के बीच यह हल्का-फुल्का संवाद दर्शाता है कि राजनीति के बीच भी मानवीय और हास्यपूर्ण पहलू हमेशा मौजूद रहते हैं।