अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, 5 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले; बढ़ा तनाव

ईरान की IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में एयरबेस के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और MQ-9 ड्रोन रखने वाले हैंगर को नुकसान पहुंचा।;

Update: 2026-07-12 10:44 GMT

तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब मध्य पूर्व के कई देशों तक पहुंच गया है। अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रविवार को कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। ईरान के अनुसार, उसने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया कि इन हमलों का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचाना था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जॉर्डन के एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले 

ईरान की IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में एयरबेस के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और MQ-9 ड्रोन रखने वाले हैंगर को नुकसान पहुंचा। जॉर्डन की ओर से इस दावे पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी लंबे समय से रही है और किसी भी हमले का असर क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है।

बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे से धुआं उठने का दावा

ईरान के हमलों के बाद बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे से धुआं उठने के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। इन वीडियो में सैन्य बेस के ऊपर धुएं का गुबार दिखाई दे रहा है। ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया। इसके बाद बहरीन में मिसाइल अलर्ट जारी किया गया और नागरिकों को सतर्क रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय ठिकाना मौजूद है, जो मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए अहम माना जाता है।

अमेरिका ने पहले ईरान के सैन्य ठिकानों पर की थी कार्रवाई

ईरान की जवाबी कार्रवाई से पहले अमेरिका ने ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों पर बमबारी करने का दावा किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में एक साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज पर हुए हमले के बाद की गई थी। अमेरिका के मुताबिक, इस हमले में जहाज में आग लग गई थी, उसका इंजन क्षतिग्रस्त हुआ और चालक दल का एक सदस्य लापता हो गया था। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

कई देशों में बढ़ा सैन्य तनाव

ईरान ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई के तहत कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और रडार साइटों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा बहरीन में अमेरिकी सैन्य संचार केंद्र और कतर तथा UAE की दिशा में भी मिसाइल और ड्रोन लॉन्च किए गए। इस घटनाक्रम ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका के कई सहयोगी देशों में सैन्य अलर्ट बढ़ा दिया गया है।

ओमान भी आया संघर्ष की चपेट में

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ओमान में भी ड्रोन हमले की जानकारी सामने आई है। ओमानी सरकार ने पुष्टि की कि मुसंदम गवर्नरेट में ड्रोन हमले हुए हैं। ओमान सरकार ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि देश और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इससे पहले IRGC ने दावा किया था कि उसने ओमान के दुक्म बंदरगाह पर अमेरिकी विमानवाहक पोतों के लॉजिस्टिक सपोर्ट सेंटर और ईंधन आपूर्ति ठिकानों को निशाना बनाया है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ा विवाद

ईरान ने तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। तेहरान ने कहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर भविष्य के फैसले ईरान और ओमान की आपसी सलाह से लिए जाने चाहिए। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि मस्कट में दोनों देशों के कानूनी और तकनीकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बैठक हुई। इसमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही और दोनों देशों के संप्रभु अधिकारों पर चर्चा की गई। बघाई ने कहा कि क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय कानून और अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौतों के दायरे में होनी चाहिए।

मध्य पूर्व में गहराया संकट

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डाल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई आगे बढ़ती है या कूटनीतिक रास्ते से तनाव कम करने की कोशिश की जाती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।

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