नेपाल में युवाओं का गुस्सा बढ़ा, बालेन शाह सरकार पर उठे सवाल; रोजगार और नीतियों को लेकर विरोध तेज

युवा संगठन जेन-जी नेपाल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बजट और नीतियों में युवाओं के रोजगार, आय बढ़ाने और भविष्य सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं। संगठन का आरोप है कि सरकार ने युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी, जिसके कारण असंतोष बढ़ रहा है।;

Update: 2026-07-12 08:06 GMT

काठमांडू: नेपाल में युवाओं के बीच बढ़ती नाराजगी एक बार फिर राजनीतिक संकट का कारण बनती दिखाई दे रही है। राजधानी काठमांडू समेत कई क्षेत्रों में युवा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) की नीतियों को लेकर जवाबदेही तय करना और सरकार से युवाओं के लिए ठोस कदम उठाने की अपील है। हाल के दिनों में सामने आई कुछ गंभीर घटनाओं ने देश में युवाओं की स्थिति, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों को लेकर बहस तेज कर दी है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार पर युवाओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने का आरोप लगाया है।

Gen-Z संगठन ने सरकार पर लगाए आरोप

युवा संगठन जेन-जी नेपाल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बजट और नीतियों में युवाओं के रोजगार, आय बढ़ाने और भविष्य सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं। संगठन का आरोप है कि सरकार ने युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी, जिसके कारण असंतोष बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश के युवाओं को रोजगार के अवसर, बेहतर शिक्षा और आर्थिक स्थिरता की जरूरत है।

विपक्ष ने भी साधा सरकार पर निशाना

नेपाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि सरकार युवाओं के बीच विश्वास और उम्मीद पैदा करने में असफल रही है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, युवाओं की नाराजगी केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, आर्थिक चुनौतियां और प्रशासनिक फैसलों को लेकर असंतोष शामिल है।

आत्मदाह की पुरानी घटना का फिर हुआ जिक्र

नेपाल में युवाओं से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बीच वर्ष 2023 की एक घटना भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। उस समय प्रेम आचार्य की आत्मदाह की घटना के बाद तत्कालीन काठमांडू मेयर बालेन शाह ने इसे व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया था। अब विपक्ष और प्रदर्शनकारी सवाल उठा रहे हैं कि वर्तमान परिस्थितियों पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है और युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

बालेन शाह कैसे बने युवाओं की उम्मीद का चेहरा 

बालेन शाह वर्ष 2022 में काठमांडू के मेयर बने थे। इंजीनियरिंग और संगीत से जुड़े अपने अलग अंदाज के कारण वह युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए। उन्होंने शहर की सफाई व्यवस्था, अवैध निर्माण पर कार्रवाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने जैसे कदम उठाए। हालांकि, उनके कुछ फैसलों का विरोध भी हुआ। विशेष रूप से सड़क किनारे व्यापार करने वालों और प्रभावित वर्गों ने प्रशासनिक कार्रवाइयों पर सवाल उठाए।

Gen-Z आंदोलन में दिखा बालेन का प्रभाव

नेपाल में पिछले वर्ष हुए बड़े युवा प्रदर्शनों के दौरान भी बालेन शाह का प्रभाव दिखाई दिया था। सोशल मीडिया, युवाओं की भागीदारी और भ्रष्टाचार व आर्थिक संकट के खिलाफ आवाज ने आंदोलन को व्यापक बनाया। इन प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया था। बेरोजगारी, आर्थिक अवसरों की कमी और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर लोगों में असंतोष सामने आया था। उस दौरान बालेन शाह से जुड़े गीत और संदेश युवाओं के बीच चर्चा का विषय बने थे।

चुनावी सफलता ने बदली नेपाल की राजनीति

नेपाल की राजनीति में बालेन शाह का प्रभाव चुनावी स्तर पर भी दिखाई दिया। आम चुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी सफलता मिली, जिसे पारंपरिक राजनीतिक दलों के लिए चुनौती के रूप में देखा गया। बालेन शाह ने झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हराकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की। इसके बाद कम उम्र में प्रधानमंत्री पद संभालकर उन्होंने नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू किया।

सरकार के सामने युवाओं का भरोसा जीतने की चुनौती

मौजूदा हालात ने बालेन शाह सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। युवाओं की नाराजगी को शांत करने के लिए सरकार को रोजगार, आर्थिक अवसरों और जनकल्याणकारी नीतियों पर ठोस कदम उठाने होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल में युवाओं की बढ़ती भागीदारी अब देश की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कारक बन चुकी है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत फैसले ही तय करेंगे कि यह असंतोष किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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