अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। ईरानी दावे के अनुसार, कम से कम चार बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन अमेरिकी ठिकानों की ओर दागे गए।;

Update: 2026-06-10 04:44 GMT

तेहरान/दुबई: होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अब खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। ईरानी दावे के अनुसार, कम से कम चार बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन अमेरिकी ठिकानों की ओर दागे गए, जिसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए।

बढ़ा सैन्य तनाव

ताजा तनाव की शुरुआत होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हुई घटनाओं के बाद हुई। ईरानी पक्ष का दावा है कि अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के जास्क, सीरिक और केश्म द्वीप के आसपास मौजूद रडार, एयर डिफेंस और निगरानी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करने का ऐलान किया और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं।

ईरान की अमेरिका को चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनकी सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह सुरक्षित रहना चाहता है तो उसे क्षेत्र से दूर रहना चाहिए। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा।

बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय को निशाना 

आईआरजीसी ने दावा किया है कि सबसे बड़ा हमला बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर किया गया। ईरानी मीडिया के अनुसार, स्थानीय समयानुसार तड़के करीब 2:30 बजे ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमला किया गया। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि एक मिसाइल अमेरिकी सैन्य परिसर के भीतर गिरी। अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट पश्चिम एशिया में अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण नौसैनिक तैनाती मानी जाती है और यह फारस की खाड़ी, अरब सागर तथा होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों की निगरानी करती है।

बहरीन में सायरन

हमले के दावों के बाद बहरीन के गृह मंत्रालय ने पूरे देश में सायरन बजने की पुष्टि की और नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, राजधानी के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस को निशाना

आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि कुवैत स्थित अली अल सलेम एयरबेस पर ड्रोन हमले किए गए। यह ठिकाना अमेरिकी वायुसेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हमले के बाद कुवैत की सेना ने बयान जारी करते हुए कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हैं और संदिग्ध हवाई लक्ष्यों को रोकने की कार्रवाई की जा रही है।

ईरान का दावा

ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि दक्षिणी ईरान के जाम क्षेत्र में अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया गया है। इससे संबंधित एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि अमेरिकी सेना ने अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

जॉर्डन के एयरबेस पर हमले का दावा

आईआरजीसी ने कहा कि उसने जॉर्डन के एक एयरबेस पर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला किया, जिसमें F-35 लड़ाकू विमानों के हैंगर और कमांड सेंटर समेत चार अहम ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका के खिलाफ उसके व्यापक जवाबी अभियान का हिस्सा है।

पांच मिसाइलों को मार गिराने का दावा 

दूसरी ओर, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को देश के पूर्वी हिस्से में अल-अजराक क्षेत्र की ओर बढ़ते समय हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना के मुताबिक, मिसाइलों का मलबा अलग-अलग स्थानों पर गिरा, लेकिन किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं मिली।

21 अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा

आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सेना के 21 एयर और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका की ओर से आगे कोई सैन्य कार्रवाई की जाती है, तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक और कठोर होगा।

क्षेत्रीय स्थिरता पर बढ़ी चिंता

खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बढ़ते इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं हुए, तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। फिलहाल कई देशों की नजरें अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।

Tags:    

Similar News