पाकिस्तान में सत्ता का असली केंद्र अब भी सेना, राजनीतिक संकट गहरा रहा
तेल अवीव, पाकिस्तान में सत्ता केवल निर्वाचित सरकार के हाथों में नहीं है, बल्कि देश की राजनीतिक व्यवस्था एक "हाइब्रिड सिस्टम" के तहत संचालित होती है, जिसमें सेना राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक राजनीति दोनों में निर्णायक भूमिका निभाती है। यह दावा राजनीतिक शोधकर्ता वास शेनॉय ने 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' में प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया है।;
तेल अवीव, पाकिस्तान में सत्ता केवल निर्वाचित सरकार के हाथों में नहीं है, बल्कि देश की राजनीतिक व्यवस्था एक "हाइब्रिड सिस्टम" के तहत संचालित होती है, जिसमें सेना राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक राजनीति दोनों में निर्णायक भूमिका निभाती है। यह दावा राजनीतिक शोधकर्ता वास शेनॉय ने 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' में प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार को 2024 के आम चुनावों की निष्पक्षता पर उठे सवालों, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी एवं राजनीतिक अलगाव, मीडिया पर कथित प्रतिबंध, न्यायपालिका की स्वतंत्रता में कमी और देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों के कारण वैधता के संकट का सामना करना पड़ रहा है।
जो हालात हैं उससे धारणा मजबूत हुई है कि चुनाव की महत्ता कम हो गई है। इन परिस्थितियों ने पाकिस्तान के लाखों नागरिकों के बीच यह धारणा मजबूत की है कि अब चुनाव के जरिए शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन संभव नहीं रह गया है। इसके चलते संवैधानिक राजनीति पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है और जनाक्रोश सीधे राज्य की संस्थाओं की ओर बढ़ रहा है।
शेनॉय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान का सुरक्षा माहौल लगातार बिगड़ रहा है। उनके अनुसार, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने खासकर खैबर पख्तूनख्वा में अपने हमले तेज कर दिए हैं, जबकि बलूच अलगाववादी दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में सरकार को चुनौती दे रहे हैं। इसके अलावा इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आईएस-के) और अन्य सांप्रदायिक संगठन भी सक्रिय हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि अफगानिस्तान इन समूहों में से कुछ के लिए सुरक्षित ठिकाने का काम करता है, जबकि पाकिस्तान की आतंकवादी संगठनों के प्रति अतीत की चयनात्मक नीति ने "उपयोगी" और "शत्रुतापूर्ण" माने जाने वाले संगठनों के बीच की रेखा धुंधली कर दी है।
आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए शेनॉय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहायता से फिलहाल भुगतान संतुलन संकट का तत्काल खतरा टल गया है, लेकिन पाकिस्तान अब भी भारी कर्ज, सीमित कर आधार, ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय समस्याओं, कमजोर सार्वजनिक सेवाओं और विदेशी वित्तीय सहायता पर निर्भरता जैसी संरचनात्मक चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि गरीबी, तेजी से बढ़ती आबादी और बाढ़, भीषण गर्मी तथा जल संकट जैसी समस्याएं देश की क्षमता को और कमजोर कर रही हैं।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ आर्थिक और जलवायु सहयोग जारी रखना चाहिए, लेकिन साथ ही विश्वसनीय चुनाव, मजबूत नागरिक शासन और सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ समान कार्रवाई की स्पष्ट शर्तें भी रखनी चाहिए। शेनॉय ने यह भी कहा कि वॉशिंगटन को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को उसी तरह समर्थन देने से बचना चाहिए, जैसा अतीत में जनरल जिया-उल-हक को दिया गया था।
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर भी ये रिपोर्ट आगाह करती है। शेनॉय के अनुसार, पाकिस्तान के परमाणु हथियार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और विशेष कमान एवं नियंत्रण प्रणाली के अधीन हैं तथा उनके उग्रवादी संगठनों के हाथ लगने की संभावना फिलहाल बेहद कम है।
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में अंदरूनी मिलीभगत से परमाणु सामग्री की चोरी, परमाणु ढांचे में तोड़फोड़, हथियारों के परिवहन पर हमले, संवेदनशील सामग्री के गायब होने या सैन्य तंत्र में विभाजन की स्थिति में नियंत्रण प्रणाली कमजोर पड़ने जैसे जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।