भारत का पहला रेजिडेंट एंबेसडर, बिनय जॉर्ज ने राष्ट्रपति को सौंपा परिचय पत्र

मोंटेवीडियो (उरुग्वे), ओरिएंटल रिपब्लिक ऑफ उरुग्वे को भारत का पहला रेजिडेंट एंबेसडर मिल गया है। भव्य समारोह में बिनय बिनॉय जॉर्ज ने राष्ट्रपति यामान्डु ओर्सी को अपना परिचय पत्र सौंपा। मंगलवार को समारोह की तस्वीरें और वीडियो राष्ट्रपति कार्यालय ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से साझा की।;

By :  IANS
Update: 2026-09-08 06:42 GMT

मोंटेवीडियो (उरुग्वे), ओरिएंटल रिपब्लिक ऑफ उरुग्वे को भारत का पहला रेजिडेंट एंबेसडर मिल गया है। भव्य समारोह में बिनय बिनॉय जॉर्ज ने राष्ट्रपति यामान्डु ओर्सी को अपना परिचय पत्र सौंपा। मंगलवार को समारोह की तस्वीरें और वीडियो राष्ट्रपति कार्यालय ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से साझा की।

इंस्टाग्राम रील्स में बिनय जॉर्ज को अपने क्रेडेंशियल्स (लेटर ऑफ क्रेडेंस) सौंपते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने पोस्ट में लिखा, "हमने उरुग्वे और भारत के रिश्तों में एक अहम कदम उठाया है। पहली बार, भारत के एक रेजिडेंट एंबेसडर हमारे देश में आए हैं। हमने बिनॉय जॉर्ज के क्रेडेंशियल्स स्वीकार किए और ऐसे रिश्तों का एक नया अध्याय शुरू किया जिनमें बहुत संभावनाएं हैं।"

उन्होंने आगे लिखा, "भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश और एक बड़ी ग्लोबल इकोनॉमी है। उरुग्वे के पास व्यापार बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और हमारे समाजों के बीच संबंधों को मजबूत करने के काफी मौके हैं।"

संभावनाओं के खुलते द्वार का जिक्र करते हुए आगे कहा, "दुनिया के साथ जुड़ने से हमारे प्रोडक्शन, हमारे बिजनेस और हमारे लोगों के लिए और ज़्यादा मौके बनते हैं। दरवाजे खोलना, भरोसा बनाना और देशों को एक-दूसरे के करीब लाना, उरुग्वे के विकास के लिए काम करने जैसा है। हम आगे बढ़ते रहेंगे।"

दक्षिण अमेरिका के दूसरे सबसे छोटे देश उरुग्वे की राजधानी मोंटेवीडियो में इसी साल भारत ने रेजिडेंट दूतावास खोला है। अगस्त 2026 में मोंटेवीडियो में भारतीय दूतावास ने अपना काम शुरू किया। इससे पहले अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स स्थित भारतीय दूतावास से ही उरुग्वे के कामकाज को संभाला जाता था। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1948 (आधिकारिक मान्यता 1960) में स्थापित हुए थे।

बता दें कि लेटर ऑफ क्रेडेंस एक औपचारिक दस्तावेज होता है जो किसी भी राजनयिक की दूसरे संप्रभु राज्य में राजदूत या उच्चायुक्त नियुक्त होने की पहचान होता है। वो इसके जरिए अपना परिचय प्रस्तुत करते हैं। कूटनीतिक भाषा में इस कार्यक्रम को ही क्रेडेंशियल सेरेमनी कहा जाता है।

Tags:    

Similar News