श्रीलंका ईस्टर बम धमाके मामले में दोषी को सुनाई मौत की सजा
कोलंबो, श्रीलंका के तीन न्यायाधीशों वाले हाईकोर्ट की एक विशेष पीठ ने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) पुजित जयसुंदरा को मौत की सजा सुनाई है।;
कोलंबो, श्रीलंका के तीन न्यायाधीशों वाले हाईकोर्ट की एक विशेष पीठ ने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) पुजित जयसुंदरा को मौत की सजा सुनाई है। साल 2019 में एक आत्मघाती धमाके में 260 लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने अपनी जिम्मेदारियों का ठीक से निर्वहन न करने का दोषी माना।
बहुमत से फैसला देने वाले न्यायाधीशों ने उन्हें 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमलों को रोकने में विफल रहने का दोषी ठहराया, जबकि उनके पास पहले से खुफिया चेतावनी मौजूद थी।
शुक्रवार को अदालत ने जयसुंदरा को अपने कर्तव्यों की घोर उपेक्षा करने तथा हत्या में सहायता और उकसावे का दोषी करार दिया। उन पर आरोप था कि उन्होंने उन खुफिया चेतावनियों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिनमें बताया गया था कि आत्मघाती हमलावर कोलंबो और उसके आसपास स्थित कैथोलिक चर्चों तथा पर्यटक होटलों को निशाना बनाने की योजना बना रहे हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, न्यायाधीश प्रियंता लियानागे और तिलकरत्ने बंडारा ने बहुमत का फैसला सुनाया, जबकि न्यायाधीश विराज वीरासूर्या ने असहमति व्यक्त करते हुए अलग निर्णय दिया।
बहुमत का फैसला सुनाते हुए पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश लियानागे ने कहा कि हमलों के समय जयसुंदरा देश के पुलिस प्रमुख थे और नागरिकों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी।
अदालत ने कहा कि तत्कालीन स्टेट इंटेलिजेंस सर्विस के निदेशक निलंता जयवर्धने ने 20 अप्रैल 2019 की शाम जयसुंदरा को सूचित किया था कि अगले दिन कैथोलिक चर्चों और पर्यटक होटलों पर आत्मघाती हमलों की आशंका है।
इसके बावजूद जयसुंदरा ने हमलों को रोकने के लिए कोई आवश्यक कदम नहीं उठाया।
बहुमत के फैसले में कहा गया कि अपराधों की रोकथाम और जनता की सुरक्षा के लिए नियुक्त राज्य अधिकारी होने के बावजूद जयसुंदरा ने अपने दायित्वों की गंभीर उपेक्षा की। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।
हालांकि, अपने असहमति वाले फैसले में न्यायाधीश वीरासूरिया ने कहा कि अभियोजन पक्ष जयसुंदरा के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इसलिए उन्होंने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत को पूरा फैसला सुनाने में चार घंटे से अधिक का समय लगा।
उसी दिन बाद में अदालत ने वर्ष 2019 के आतंकी हमलों से पहले मिली खुफिया चेतावनियों पर कार्रवाई न करने के मामले में तत्कालीन रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो को भी दोषी ठहराया और उन्हें भी मौत की सजा सुनाई।
21 अप्रैल 2019 को हुए सीरियल आत्मघाती बम धमाकों में 260 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि 500 से अधिक लोग घायल हुए थे।