युद्धविराम पर संकट के बादल, लेबनान में इजरायली हमले में 254 लोगों की मौत, ईरान की कड़ी चेतावनी

लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि यदि इजरायल ने अपने हमले जारी रखे, तो तेहरान युद्धविराम से पीछे हट सकता है।

Update: 2026-04-09 03:07 GMT
तेहरान/बेरुत/वॉशिंगटन । मध्य पूर्व में हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। बुधवार तक जहां दोनों पक्ष संघर्षविराम का पालन करते नजर आ रहे थे, वहीं इसके कुछ ही घंटों बाद लेबनान में इजरायल द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए हवाई हमलों ने स्थिति को फिर से विस्फोटक बना दिया है। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में घायल होने की खबरों ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।

लेबनान में भीषण हमला, सैकड़ों हताहत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने लेबनान में अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया। हमले में 254 लोगों की मौत हो गई। करीब 800 लोग घायल हो गए हैं। इन हमलों के बाद यह आशंका गहरा गई है कि हालिया युद्धविराम समझौता कमजोर पड़ सकता है और क्षेत्र एक बार फिर व्यापक संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।

ईरान की सीजफायर तोड़ने की धमकी

लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि यदि इजरायल ने अपने हमले जारी रखे, तो तेहरान युद्धविराम से पीछे हट सकता है। उन्होंने अमेरिका पर “दोहरा रवैया” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका को तय करना होगा कि वह शांति चाहता है या युद्ध। दोनों चीजें एक साथ नहीं चल सकती हैं। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने जैसे बड़े कदम उठा सकता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।

अमेरिका का रुख: लेबनान समझौते का हिस्सा नहीं

इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि लेबनान इस युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका-ईरान सीजफायर केवल दोनों देशों के बीच सीमित है। इसमें लेबनान या हिजबुल्लाह को शामिल नहीं किया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसी रुख का समर्थन करते हुए कहा कि हिजबुल्लाह को समझौते में शामिल नहीं किया गया था और लेबनान की स्थिति अलग है।

इजरायल का तर्क: हिजबुल्लाह को निशाना बनाया

इजरायल ने अपने हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि उसका निशाना हिजबुल्लाह के ठिकाने थे। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि यह कार्रवाई हिजबुल्लाह के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन थी और इसमें सैकड़ों आतंकियों को निशाना बनाया गया। इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह लेबनान में सक्रिय है इसलिए यह क्षेत्र सीजफायर के दायरे में नहीं आता है।

हिजबुल्लाह की जवाबी कार्रवाई

हिजबुल्लाह ने इजरायल पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाया है। संगठन ने दावा किया कि उसने जवाब में उत्तरी इजरायल पर रॉकेट दागे। इससे क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ने की आशंका है

संयुक्त राष्ट्र की कड़ी प्रतिक्रिया

लेबनान में हुए हमलों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने गहरी चिंता जताई है। नागरिकों की मौत और बड़े पैमाने पर विनाश को “भयावह” बताया। सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। यूएन का कहना है कि ऐसे हमले क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

खाड़ी क्षेत्र में भी बढ़ा तनाव

लेबनान के अलावा खाड़ी क्षेत्र में भी हालात बिगड़ते नजर आए। ईरान ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया। यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर बनाई गई थी। इससे रोजाना लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा यूएई, कुवैत और बहरीन में भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें हैं। अबू धाबी में एक गैस प्लांट में आग लगने की सूचना है।

ईरान में तेल रिफाइनरी पर हमला

इस बीच, ईरान के लावान द्वीप पर स्थित एक तेल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ। आग लगने की घटना सामने आई है। हालांकि, किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई। हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

सीजफायर पर बढ़ते सवाल

इन घटनाओं के बाद यह साफ हो गया है कि युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है। अलग-अलग मोर्चों पर संघर्ष जारी है।

समझौते की सीमित परिभाषा

क्षेत्रीय शक्तियों की अलग-अलग रणनीतियां हैं। ये सभी कारक इसे और जटिल बना रहे हैं।

क्या बढ़ सकता है बड़ा संघर्ष?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लेबनान और खाड़ी क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह संघर्ष फिर से बड़े युद्ध में बदल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का खतरा है। इसका वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। 
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