Artemis II ने रचा इतिहास: चंद्रमा के अनदेखे हिस्से तक पहुंचा इंसान, तोड़ा Apollo 13 का 50 साल पुराना रिकॉर्ड

सोमवार को अंतरिक्षयात्री उस बिंदु तक पहुंच गए, जो मानव इतिहास में अब तक की सबसे अधिक दूरी मानी जा रही है। आने वाले घंटों में यह दूरी बढ़कर लगभग 252,760 मील तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

Update: 2026-04-07 06:15 GMT
ह्यूस्टन: नासा के आर्टेमिस-2 मिशन ने अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। इस मिशन पर गए चार अंतरिक्षयात्रियों ने वह कर दिखाया है जो अब तक कोई मानव नहीं कर पाया था। आर्टेमिस-2 के दल ने पृथ्वी से 248,655 मील (करीब 4 लाख किलोमीटर) दूर जाकर अपोलो-13 मिशन का 56 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
सोमवार को अंतरिक्षयात्री उस बिंदु तक पहुंच गए, जो मानव इतिहास में अब तक की सबसे अधिक दूरी मानी जा रही है। आने वाले घंटों में यह दूरी बढ़कर लगभग 252,760 मील तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

चार अंतरिक्षयात्रियों की ऐतिहासिक टीम

इस मिशन में कुल चार अंतरिक्षयात्री शामिल हैं—तीन अमेरिका से और एक कनाडा से। रीड वाइजमैन (NASA), विक्टर ग्लोवर (NASA), क्रिस्टीना कोच (NASA) और जेरेमी हैंसन (कनाडा)। ये सभी पिछले सप्ताह नासा के ओरियन कैप्सूल में सवार होकर चंद्रमा की यात्रा पर निकले थे। यह मिशन आर्टेमिस कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भविष्य में इंसानों को फिर से चंद्रमा पर उतारना है।

अपोलो युग के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा

अब तक यह रिकॉर्ड 1970 के अपोलो-13 मिशन के नाम था, जिसने 248,655 मील की दूरी तय की थी। उस मिशन को कमांडर जिम लवेल ने लीड किया था। दिलचस्प बात यह है कि आर्टेमिस-2 के अंतरिक्षयात्रियों ने उड़ान के छठे दिन जिम लवेल का रिकॉर्ड किया गया एक संदेश सुना। इस संदेश में उन्होंने कहा था, “यह ऐतिहासिक दिन है। मुझे पता है कि आप व्यस्त होंगे, लेकिन इस अद्भुत नजारे का आनंद लेना न भूलें।” जिम लवेल का पिछले साल 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया था, लेकिन उनका यह संदेश इस मिशन के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ।

चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश

आर्टेमिस-2 के अंतरिक्षयात्री अब चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं। वे चंद्रमा के दूर वाले हिस्से (फार साइड) का चक्कर लगाएंगे, यह वही हिस्सा है जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। इस दौरान अंतरिक्षयात्री चंद्रमा से लगभग 4,000 मील की ऊंचाई से गुजरेंगे और उसके सतह का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

41 मिनट का ‘ब्लैकआउट’

चंद्रमा के पीछे पहुंचने पर अंतरिक्षयात्रियों का संपर्क नासा के डीप स्पेस नेटवर्क से लगभग 41 मिनट के लिए टूट जाएगा। यह अंतरिक्ष मिशनों का एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसे ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ कहा जाता है। इस दौरान अंतरिक्षयात्री पूरी तरह अपने सिस्टम और प्रशिक्षण पर निर्भर रहते हैं।

6 घंटे का खास फ्लाईबाई मिशन

चंद्रमा के पास से गुजरने की यह प्रक्रिया करीब 6 घंटे तक चलेगी। इस दौरान अंतरिक्षयात्री पेशेवर कैमरों से चंद्रमा की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेंगे।

उन्हें कई दुर्लभ खगोलीय दृश्य देखने का अवसर मिलेगा, जैसे: अंतरिक्ष से पृथ्वी का बेहद छोटा दिखाई देना, चंद्र क्षितिज पर चंद्रोदय और चंद्रास्त, पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा, जब चंद्रमा सूर्य को ढक लेगा। इन दृश्यों को अब तक केवल कुछ ही अंतरिक्षयात्रियों ने देखा है, लेकिन आर्टेमिस-2 के दल को इससे भी अलग और नए अनुभव मिलेंगे।

इतिहास में पहली बार ऐसे दृश्य

नासा के अनुसार, इस मिशन के दौरान अंतरिक्षयात्री ऐसे दृश्य देखेंगे, जिन्हें अपोलो मिशनों के 24 अंतरिक्षयात्रियों ने भी नहीं देखा था। यह मिशन तकनीकी रूप से भी बेहद उन्नत है, जिससे डेटा और तस्वीरें पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक और विस्तृत होंगी।

चंद्रमा पर लैंडिंग नहीं, लेकिन बड़ा कदम

गौरतलब है कि आर्टेमिस-2 मिशन में अंतरिक्षयात्री चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेंगे। यह एक फ्लाईबाई मिशन है, जिसमें चंद्रमा के चारों ओर घूमकर पृथ्वी पर वापसी की जाएगी। हालांकि, 1972 के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। इसे भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

लाइव कवरेज से दुनिया देख रही मिशन

नासा इस पूरे मिशन का 24 घंटे लाइव प्रसारण कर रहा है। लोग इसे यूट्यूब और नासा के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देख सकते हैं।

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