वॉशिंगटन: अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए डिग्री पूरी करने के बाद नौकरी करना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो सकता है। ट्रंप प्रशासन ने विदेशी छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम से जुड़ी नई फीस का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत किसी छात्र के OPT के लिए पहली बार आवेदन करने पर संबंधित कॉलेज या यूनिवर्सिटी को 70 हजार डॉलर यानी करीब 68 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ सकता है। प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में इसका सबसे ज्यादा असर भारत और चीन से आने वाले छात्रों पर पड़ने की आशंका है।
OPT के लिए पहली बार 70 हजार डॉलर फीस
OPT अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को अपनी पढ़ाई से संबंधित क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने और डिग्री पूरी करने के बाद काम करने की अनुमति देता है। मौजूदा व्यवस्था में सामान्य तौर पर छात्रों को एक साल तक काम करने का मौका मिलता है। वहीं, STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स से जुड़े छात्रों को अतिरिक्त दो साल तक OPT का लाभ मिल सकता है। ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव के अनुसार, पहली बार OPT के लिए आवेदन करने पर छात्र से सीधे फीस नहीं ली जाएगी। यह राशि उसके कॉलेज या यूनिवर्सिटी को देनी होगी। हालांकि, 70 हजार डॉलर की फीस संस्थानों के लिए बड़ा अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती है। यदि छात्र OPT को आगे बढ़ाता है तो हर बार नवीनीकरण के लिए 30 हजार डॉलर यानी करीब 29 लाख रुपये की फीस का प्रस्ताव है।
भारत और चीन के छात्रों पर सबसे ज्यादा असर
अमेरिका में विदेशी छात्रों की बड़ी संख्या भारत और चीन से आती है। 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में करीब 3.63 लाख भारतीय और 2.66 लाख चीनी छात्र पढ़ रहे थे। दोनों देशों को मिलाकर यह संख्या लगभग 6.3 लाख है। भारतीय छात्र विशेष रूप से इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, टेक्नोलॉजी और अन्य STEM विषयों में बड़ी संख्या में दाखिला लेते हैं। ऐसे छात्रों के लिए OPT अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसके जरिए उन्हें पढ़ाई के बाद अपने क्षेत्र में काम करने और अनुभव हासिल करने का अवसर मिलता है।
टेक कंपनियों और यूनिवर्सिटी की चिंता बढ़ी
OPT के जरिए बड़ी संख्या में विदेशी छात्र अमेरिकी कंपनियों में काम करते हैं। खासकर टेक्नोलॉजी और STEM से जुड़े उद्योगों में विदेशी छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रस्तावित फीस से कंपनियों और उच्च शिक्षा संस्थानों पर अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े संगठन NAFSA ने प्रस्ताव का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि विदेशी छात्रों को अमेरिका आने से हतोत्साहित करने वाली नीतियां देश की इनोवेशन क्षमता और आर्थिक विकास को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
DHS ने बताया फीस बढ़ाने का कारण
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) का कहना है कि OPT कार्यक्रम में धोखाधड़ी और इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। विभाग का आरोप है कि कुछ मामलों में OPT का इस्तेमाल कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को अमेरिकी श्रम बाजार में लाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, अभी यह अंतिम फैसला नहीं है। प्रस्ताव पर जनता, शिक्षण संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों को अपनी राय देने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद सरकार प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करके अंतिम निर्णय ले सकती है।
ट्रंप प्रशासन पहले भी कर चुका है सख्ती
विदेशी छात्रों को लेकर ट्रंप प्रशासन की यह पहली सख्त पहल नहीं है। पिछले साल बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों का कानूनी दर्जा खत्म किया गया था। इनमें कुछ छात्रों को हिरासत में लिए जाने और अमेरिका से बाहर भेजे जाने की खबरें भी सामने आई थीं। इसके अलावा, सरकार ने विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि को लेकर भी नए नियम प्रस्तावित किए थे। इन नियमों का कॉलेजों और यूनिवर्सिटी ने विरोध किया। सितंबर में एक संघीय अदालत ने इस नियम को लागू होने से रोक दिया था।
भारतीय छात्रों के आवेदनों में 15 फीसदी गिरावट
अमेरिका में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की दिलचस्पी पर भी इन सख्त नीतियों का असर दिखाई देने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अमेरिका आने वाले छात्र आवेदकों की संख्या में करीब 15 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इसके पीछे सख्त वीजा और इमिग्रेशन नीतियों के अलावा अमेरिका में छात्रों के रहने की अवधि को लेकर अनिश्चितता और भारी फीस का डर भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। अमेरिकी सरकार छात्र और विजिटर वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव कर चुकी है, जिससे कुछ मामलों में अमेरिका में रहने की अवधि चार साल तक सीमित हो सकती है। ऐसे में OPT पर प्रस्तावित भारी फीस विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई के बाद करियर बनाने की योजना को और महंगा और अनिश्चित बना सकती है। खासकर भारतीय छात्रों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या STEM और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों से जुड़ी है।