नेपाल-भारत बॉर्डर के सिर्फ एक चेकप्वाइंट पर फंसे 600 कंटेनर! भारतीय सामानों पर टैक्स लगा कैसे फंसी बालेन सरकार

नेपाल-भारत के बीच सबसे व्यस्त भूमि मार्ग बीरगंज बॉर्डर पर हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। नेपाली न्यूज पोर्टल ‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां करीब 600 कंटेनर फंसे हुए हैं। इन कंटेनरों के क्लियरेंस में देरी से न केवल व्यापार प्रभावित हुआ है, बल्कि सरकार के राजस्व संग्रह पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।;

Update: 2026-05-01 06:19 GMT

काठमांडू/बीरगंज: नेपाल सरकार द्वारा राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया नया कस्टम नियम अब उसके लिए ही परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है। हाल ही में लागू किए गए इस नियम के तहत भारत से नेपाल आने वाले सामान पर सख्त शर्तें लागू की गईं, लेकिन इसका सीधा असर व्यापार और सीमा पार आवाजाही पर पड़ा है। स्थिति यह हो गई है कि प्रमुख बॉर्डर प्वाइंट्स पर भारी जाम लग गया है और सैकड़ों कंटेनर क्लियरेंस का इंतजार कर रहे हैं।

100 नेपाली रुपए से अधिक सामान पर ड्यूटी अनिवार्य

सरकार के नए नियम के मुताबिक, यदि कोई नेपाली नागरिक भारत से 100 नेपाली रुपए (NPR) से अधिक मूल्य का सामान लेकर आता है, तो उसे कस्टम ड्यूटी चुकानी होगी। इसके साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया कि हर सामान पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। सरकार का मानना था कि इससे टैक्स संग्रह में पारदर्शिता आएगी और राजस्व बढ़ेगा।

MRP नियम बना सबसे बड़ी अड़चन

हालांकि, इस नियम का सबसे विवादास्पद हिस्सा MRP को लेकर अनिवार्यता बन गया है। भारत से आने वाले कई सामानों पर या तो MRP स्पष्ट नहीं होती या फिर अलग फॉर्मेट में होती है, जिससे कस्टम अधिकारियों को जांच में दिक्कतें आने लगीं। नतीजतन, कस्टम प्रक्रिया धीमी हो गई और क्लियरेंस में देरी होने लगी।

बीरगंज बॉर्डर पर 600 कंटेनर फंसे

नेपाल-भारत के बीच सबसे व्यस्त भूमि मार्ग बीरगंज बॉर्डर पर हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। नेपाली न्यूज पोर्टल ‘रातोपाटी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां करीब 600 कंटेनर फंसे हुए हैं। इन कंटेनरों के क्लियरेंस में देरी से न केवल व्यापार प्रभावित हुआ है, बल्कि सरकार के राजस्व संग्रह पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।

भन्सार विभाग का प्रस्ताव ठुकराया गया

स्थिति को संभालने के लिए भन्सार (कस्टम) विभाग ने एक व्यावहारिक समाधान सुझाया था। विभाग ने प्रस्ताव दिया कि जिन सामानों पर MRP नहीं है, उन्हें गोदाम में ले जाकर लेबल लगाने की अनुमति दी जाए, ताकि प्रक्रिया आगे बढ़ सके। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे समस्या और बढ़ गई।

व्यापारियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी

नए नियम के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और व्यापारियों में काफी असंतोष देखने को मिला। छोटे व्यापारी, जो रोजमर्रा के सामान के लिए भारत पर निर्भर हैं, इस नियम से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उन्हें न केवल अतिरिक्त टैक्स देना पड़ रहा है, बल्कि कस्टम प्रक्रिया में लगने वाले समय और जटिलताओं का भी सामना करना पड़ रहा है।

सरकार ने दी आंशिक राहत

विरोध और बढ़ती समस्याओं को देखते हुए नेपाल सरकार ने अपने फैसले में कुछ हद तक ढील दी है। सरकार ने घोषणा की है कि अब सीमा पर आने वाले लोग खुद अपने सामान की MRP घोषित कर सकेंगे, जिससे कस्टम क्लियरेंस की प्रक्रिया को थोड़ा आसान बनाया जा सके।

कच्चे माल और नाशवान वस्तुओं को छूट

इसके अलावा, सरकार ने उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं जैसे फल और सब्जियों को MRP नियम से अस्थायी राहत देने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति को बाधित होने से बचाना है।

राजस्व बनाम सुगमता की चुनौती

यह पूरा मामला इस बात को दर्शाता है कि राजस्व बढ़ाने के लिए बनाए गए नियम अगर व्यावहारिक नहीं होते, तो वे उल्टा असर डाल सकते हैं। सरकार के सामने अब चुनौती है कि वह टैक्स संग्रह और व्यापारिक सुगमता के बीच संतुलन कैसे बनाए।

सुधार की जरूरत

नेपाल सरकार का यह कदम भले ही राजस्व बढ़ाने के इरादे से उठाया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत ने इसकी कमियों को उजागर कर दिया है। यदि जल्द ही नियमों में व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो इससे व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर और भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, सरकार द्वारा दी गई आंशिक राहत से कुछ हद तक स्थिति सुधरने की उम्मीद जरूर है, लेकिन स्थायी समाधान अभी बाकी है।

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