मौजूदा हालात में गाजीपुर लैंडफिल से निपटने में लग जाएंगे 25 साल
दिल्ली विधानसभा पर्यावरण समिति ने पूर्वी और उत्तरी दिल्ली नगर निगम के साथ वायु प्रदूषण के मुद्दे पर बुधवार को एक अहम बैठक की
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा पर्यावरण समिति ने पूर्वी और उत्तरी दिल्ली नगर निगम के साथ वायु प्रदूषण के मुद्दे पर बुधवार को एक अहम बैठक की। विधान सभा समिति के मुताबिक लैंडफिल साइट और प्रदूषण से निपटने के लिए दोनों नगर निगम के पास योजना का अभाव है। विधानसभा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष आतिशी ने दिल्ली के गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइटों पर लगातार आग लगने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए एक कार्य योजना बनाने को कहा। बैठक के दौरान आतिशी ने कहा, "यही हाल रहा तो नगर निगम सिर्फ गाजीपुर लैंडफिल से निपटने में 25 साल लग जाएंगे।"
बैठक में प्रमुख सचिव विजिलेंस राजीव वर्मा, ईडीएमसी के अपर आयुक्त डॉ. बृजेश सिंह, ईडीएमसी के मुख्य अभियंता प्रदीप खंडेलवाल तथा नार्थ दिल्ली एमसीडी के मुख्य अभियंता नौरंग सिंह सहित अन्य लोग शामिल हुए।
आतिशी ने कहा, "गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल में लगातार आग लगने से वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में दिल्ली सरकार के प्रयासों पर बुरा असर हुआ है। नवंबर के अंतिम सप्ताह में आग की घटनाओं से पूर्वी और उत्तरी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया।"
बैठक में आतिशी ने कूड़े के ढेर की ऊंचाई, कूड़े के ढेर बढ़ने की दर, छह महीनों में साइटों पर आग की संख्या और आवृत्ति के साथ ही प्रतिदिन मिथेन और अन्य हानिकारक गैसों के उत्सर्जन के अनुमान संबंधी पांच प्रश्नों पर जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि लैंडफिल साइटों में प्रदूषण और आग से निपटने के लिए नगर निगम ने क्या कदम उठाए।
इस संबंध में संतोषजनक जवाब न मिलने पर आतिशी ने कहा कि यही हाल रहा तो आपको सिर्फ गाजीपुर लैंडफिल से निपटने में 25 साल लग जाएंगे। उन्होंने कहा कि आपको और मुझे दिल्ली के करदाताओं के टैक्स के पैसों से वेतन मिलता है। इसलिए दिल्ली नगर निगमों के आयुक्त के रूप में दिल्ली के नागरिकों के प्रति कर्तव्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पर्यावरण समिति ने एमसीडी को निर्देश दिया कि लैंडफिल को जमीनी स्तर पर लाने के लिए अगले बुधवार को प्लान और टाइमलाइन जमा करें। साथ ही, ड्यूटी पर तैनात उन इंजीनियरों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दें, जिनकी लापरवाही से पिछले 5 साल में आग लगी।
आतिशी ने कहा कि ऑर्गेनिक एवं इन-ऑर्गेनिक कचरे का प्रारंभ में ही अलगाव करना ठोस उपाय है, इसलिए एमसीडी इस संबंध में योजना, संसाधनों और सभी वाडरें में लागू करने की समय सीमा स्पष्ट करे। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन पर पिछले पांच वर्षों में व्यय, निविदा प्रक्रिया और इसमें शामिल एजेंसियों की भी जानकारी मांगी।