अमेरा खदान से रोज सैकड़ों टन कोयले की चोरी

एसईसीएल की अमेरा ओपन कास्ट परियोजना में इन दिनों धनबाद की तर्ज पर सक्रिय कोयला माफियाओं के इशारे पर सैकड़ों ग्रामीण महिला पुरुषों द्वारा दिनदहाड़े खदान परिसर में घुसकर रोजाना सैकड़ों टन कोयले की चोरी की

Update: 2018-06-21 12:10 GMT

अम्बिकापुर। एसईसीएल की अमेरा ओपन कास्ट परियोजना में इन दिनों धनबाद की तर्ज पर सक्रिय कोयला माफियाओं के इशारे पर सैकड़ों ग्रामीण महिला पुरुषों द्वारा दिनदहाड़े खदान परिसर में घुसकर रोजाना सैकड़ों टन कोयले की चोरी की जा रही है। पुलिसिया संरक्षण में कोल माफिया के गुर्गों द्वारा खदान के कांटा घर से थोड़ी दूरी पर खुलेआम कांटा लगा कर चोरी के कोयले की खरीदी कर ट्रकों के माध्यम से कोयले की तस्करी की जा रही है। एसईसीएल प्रबंधन की बार.बार शिकायत के बावजूद पुलिस द्वारा कोयला तस्करों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं किए जाने से पुलिस की कार्यशैली संदिग्ध नजर आ रही है।

गौरतलब है कि कोयला तस्करों के इशारे पर एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की अमेरा ओपन कास्ट परियोजना के आसपास स्थित अमेरा गांव सहित चिलबिल, सिंगिटानाए, पुहपुटरा, तीतर खांड, सुखरी, कटकोना, सिरकोतंगा, कोरजा, नवापारा, बगदर्री, पतरापारा, मुडेसा, गोरता, गणेशपुर, भरतपुर, परसोढ़ी कला आदि करीब दो दर्जन गांव के एक हजार से अधिक ग्रामीणों ने कोयला चोरी को कमाई का जरिया बना लिया है। पुलिस एवं तथाकथित अधिकारियों के संरक्षण में तेजी से फल फूल रहे कोयले के अवैध कारोबार में लिप्त अपराधी प्रवृत्ति के गिरोह के साथ कोयला चोरी को कमाई का जरिया बना चुके ग्रामीण महिला पुरुष रोजाना सैकड़ों के झुंड में जबरन अमेरा खदान में घुसकर जान जोखिम में डालते हुए कोल फेस एवं कोल स्टॉक के अलावा खदान के ओल्ड वर्किंग फेस में करीब 75 से 80 फीट नीचे उतर कर अवैध उत्खनन कर भारी मात्रा में कोयला चोरी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। जिससे कभी भी भयंकर जानलेवा हादसा घटित हो सकता है।
 

अवैध उत्खनन से जान का खतरा
कोयला कामगारों ने बताया कि खदान के कोल फेस व कोल स्टॉक से कोयला चोरी करने के साथ.साथ भारी तादाद में ग्रामीण महिला पुरुषों द्वारा जान जोखिम में डालते हुए खदान के ओल्ड वर्किंग फेस में 75 से 80 फुट नीचे उतर कर अवैध उत्खनन करते हुए गुफा नुमा एवं कुआं नुमा बन चुके स्थल से भारी मात्रा में कोयले की चोरी की जा रही है। जिससे डीजीएमएस के दिशा निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ती हुई नजर आ रही हैं। 

कोयला चोर गिरोह को तथाकथित पुलिसकर्मियों का संरक्षण होने के कारण खान प्रबंधन कोयला चोरी रोक पाने में पूरी तरह अक्षम नजर आ रहा है।
 

खुलेआम जारी है कोयला तस्करी
अमेरा खदान में सरेआम घुसकर सैकड़ों ग्रामीण महिला पुरुषों द्वारा रोजाना चोरी किए जा रहे कोयले की खरीदी कोयला तस्करों के गुर्गों द्वारा खदान के कांटा घर से थोड़ी दूरी पर खुलेआम कांटा लगा कर की जा रही है। कोयला तस्करों ने चिलबिल गांव को भी कोयला तस्करी का अड्डा बना रखा है।रोजाना 8-10 ट्रक चोरी का कोयला पार किया जा रहा है। दो दिन पूर्व कोयला चोरों द्वारा खदान से भारी मात्रा में कोयला चोरी कर खदान के बाहर एकत्र किए जाने का कोयला कर्मचारियों द्वारा विरोध किए जाने पर वहां पहुंची लखनपुर पुलिस ने कोयला तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय बिना कोई कार्यवाही किए करीब 40 टन कोयले को खान प्रबंधन के सुपुर्द कर दिया था। इस मामले में भी कोई कार्यवाही नहीं किए जाने से पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।

ईट भों में खप रहा है चोरी का कोयला
सूत्रों की माने तो अमेरा खदान के आसपास लखनपुर सहित सुखरी, गुमगरा, रनपुर, पुहपुटरा, सिरकोतंगा, कृष्णपुर, कालापारा, बिनकरा, लब्जी, गोरता, थोर, कटकोना आदि ग्रामों मे संचालित अधिकांश वैध एवं अवैध ईंट भ_ों में खदान से चोरी का कोयला खपाया जा रहा है। कोयला खदान से लगे क्षेत्र में खनिज विभाग एवं पुलिस विभाग के संरक्षण में 100 से अधिक बंगला भ_े अवैध रूप से संचालित है। जिससे शासन को राजस्व की भारी क्षति हो रही है। ज्ञात हो कि कोयला तस्करी से जुड़े अपराधी नुमा युवकों के गिरोह ने अमेरा ओपन कास्ट परियोजना के निकट स्थित ग्रामों को कोयला तस्करी का अड्डा बना रखा है।

कंपनी को करोड़ों की क्षति
उत्पादन संकट से जूझ रही अमेरा ओपन कास्ट परियोजना से भारी मात्रा में हो रही कोयले की चोरी से खदान का अस्तित्व संकट में है। चालू वित्तीय वर्ष के बीते ढाई माह में ही यह खदान अपने उत्पादन लक्ष्य से 235321 टन पीछे चल रही है। सूत्रों की माने तो एसईसीएल प्रबंधन की उदासीन कार्य शैली एवं कथित पुलिसिया सांठगांठ के कारण इस खदान से प्रतिमाह करीब 3 करोड़ की लागत से कोयले की चोरी होने से कंपनी को अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ रहा है।
कलेक्टर, एसपी के पहुंचने का भी असर नहीं
एसईसीएल की अमेरा ओपन कास्ट परियोजना में करीब तीन माह पूर्व सरगुजा कलेक्टर किरण कौशल तथा पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार ने खदान का निरीक्षण करते हुए खान प्रबंधन को कोयला चोरी रोकने के साथ साथ अन्य दिशा निर्देश दिए थे।
 किंतु उसके बावजूद खदान के ओल्ड वर्किंग फेस में घुसकर ग्रामीण महिला पुरुष अवैध माइनिंग कर कोयला चोरी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। खान प्रबंधन कोयला चोरी रोक पाने में पूरी तरह असफल है। इस संबंध में एसईसीएल प्रबंधन का कहना है कि ग्रामीण महिला पुरुष काफी संख्या में कोयल कोयला चोरी करने आते हैं। उन्हें रोकने पर वे मारपीट करने पर आमादा हो जाते हैं। कोयला चोरी रोकने प्रबंधन द्वारा लखनपुर पुलिस से लेकर पुलिस एवं जिला प्रशासन के आला अफसरों को पत्र लिखकर वस्तु स्थिति से अवगत कराते हुए समय-समय पर कोयला चोरी पर रोक लगाने की मांग की जाती रहती है। किन्तु अपेक्षित कार्यवाही नहीं हो पाने के कारण कोयला चोरों के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार खान सुरक्षा की धज्जियां उड़ाते हुए कोयला चोरी की वारदात को अंजाम देकर कंपनी को अपूर्णीय क्षति पहुंचा रहे हैं। खान प्रबंधन मौन
खदान से रोजाना भारी मात्रा में लाखों रूपये के कोयले की चोरी की जा रही है।
 कोयला चोरी रोक पाने में खान प्रबंधन पूरी तरह पंगु नजर आ रहा है। पुलिसिया संरक्षण के कारण कोयला चोरों के हौसले बुलंद हैं। बार.बार शिकायत के बावजूद पुलिस द्वारा कोयला चोरों के विरुद्ध कार्यवाही का नहीं किया जाना कोयला तस्करी को उनका संरक्षण प्राप्त होने का प्रमाण है।
 

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