लोन फ्रॉड केस: ईडी ने बैंक ऑफ इंडिया को लौटाई 1.44 करोड़ की संपत्तियां

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला कार्यालय ने एक निजी कंपनी से जुड़े ऋण धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ इंडिया को 1.44 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां वापस कर दी है

Update: 2026-01-09 00:50 GMT

अरविंद कास्टिंग धोखाधड़ी मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

  • जाली दस्तावेजों से लिया गया ऋण, जांच में खुलासा
  • धर्मशाला कोर्ट के आदेश पर बैंक को मिली जब्त संपत्ति
  • मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम के तहत पीड़ित बैंक को राहत

शिमला। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला कार्यालय ने एक निजी कंपनी से जुड़े ऋण धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ इंडिया को 1.44 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां वापस कर दी है। एक अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

ईडी ने एक बयान में कहा कि यह वापसी अरविंद कास्टिंग से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले से संबंधित है, जिसमें कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का उपयोग करके ऋण प्राप्त किए गए थे और बाद में भुगतान में चूक हुई थी।

ईडी ने कहा कि यह कार्रवाई पीड़ित बैंकों में से एक को अपराध की आय वापस करने के लिए की गई थी।

ईडी ने हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हारोली पुलिस स्टेशन में 19 मई, 2014 को भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 92 के आधार पर अपनी जांच शुरू की।

ईडी ने बताया कि एफआईआर अरविंद कास्टिंग और अन्य के खिलाफ फर्जी और जाली दस्तावेज बनाकर वित्तीय संस्थानों से धोखाधड़ी से ऋण प्राप्त करने और स्वीकृत राशि का भुगतान न करने के आरोप में दर्ज की गई थी।

जांच में पता चला कि अरविंद कास्टिंग और अन्य आरोपियों ने 2014 में गलत बयानी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से ऋण प्राप्त किए थे। आरोप है कि ऋण राशि को स्वीकृत उद्देश्यों के लिए उपयोग करने के बजाय संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप ऋण देने वाली संस्थाओं को अनुचित नुकसान हुआ।

इससे पहले, ईडी ने लगभग 3.51 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया था। बाद में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत न्याय निर्णायक प्राधिकरण ने इन अस्थायी कुर्की आदेशों की पुष्टि कर दी।

एजेंसी ने बाद में 15 जून, 2020 को धर्मशाला के विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) के समक्ष अभियोग शिकायत दर्ज की। न्यायालय ने 1 मार्च, 2021 को शिकायत का संज्ञान लिया।

मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम, 2002 के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से अपराध से प्राप्त धन को वास्तविक और वैध दावेदारों और मनी लॉन्ड्रिंग के पीड़ितों को वापस दिलाने के लिए ईडी ने धर्मशाला स्थित विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) के समक्ष अनापत्ति याचिका प्रस्तुत की और बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में कुर्क की गई अचल संपत्तियों के एक हिस्से को जारी करने का अनुरोध किया।

ईडी की याचिका के आधार पर विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) ने 6 जनवरी, 2026 को एक आदेश पारित किया, जिसमें बैंक ऑफ इंडिया को 1.44 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां वापस करने का निर्देश दिया गया।

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