Himachal Pradesh: तीन दिन तक मालिक के शव का पहरा देता रहा पालतू कुत्ता, चार फुट बर्फ में वफादारी की मिसाल

कई दिनों की मशक्कत के बाद, सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत दल एक दुर्गम स्थान तक पहुंचा। वहां जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। चार फुट मोटी बर्फ की चादर के नीचे 14 वर्षीय किशोर पीयूष, पुत्र विक्रमजीत, निवासी गांव घरेड का शव दबा हुआ था।

Update: 2026-01-26 21:16 GMT

चंबा: हिमाचल प्रदेश के भरमौर उपमंडल से इंसानियत और वफ़ादारी की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने खोज एवं बचाव दल से लेकर पूरे इलाके को भावुक कर दिया। बर्फ से ढकी पहाड़ियों, सन्नाटे और जानलेवा ठंड के बीच जहां इंसान बेबस नजर आया, वहीं एक बेज़ुबान पालतू कुत्ते ने वफ़ादारी की ऐसी मिसाल पेश की, जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी। मलकोता क्षेत्र में लापता युवकों की तलाश के दौरान जब राहत टीमों ने एक किशोर का शव बरामद किया, तो उसके पास तीन दिनों से डटा उसका पालतू कुत्ता किसी प्रहरी की तरह मौजूद था।

22 जनवरी से लापता थे युवक

जानकारी के अनुसार, भरमौर उपमंडल के मलकोता क्षेत्र में 22 जनवरी से कुछ युवक लापता थे। इलाके में अचानक हुई भारी बर्फबारी और तापमान में तेज गिरावट के चलते हालात बेहद खतरनाक हो गए। दुर्गम पहाड़ी रास्ते, चारों ओर जमी मोटी बर्फ और लगातार खराब मौसम ने खोज अभियान को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया। लापता युवकों की तलाश के लिए प्रशासन ने पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों के सहयोग से व्यापक खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया।

चार फुट मोटी बर्फ में दबा मिला किशोर का शव

कई दिनों की मशक्कत के बाद, सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत दल एक दुर्गम स्थान तक पहुंचा। वहां जो दृश्य सामने आया, उसने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। चार फुट मोटी बर्फ की चादर के नीचे 14 वर्षीय किशोर पीयूष, पुत्र विक्रमजीत, निवासी गांव घरेड का शव दबा हुआ था। बताया जा रहा है कि पीयूष और उसके साथी जिस स्थान पर रात में रुके थे, वहीं अचानक भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड ने हालात को जानलेवा बना दिया।

शव के पास तीन दिन से डटा था पालतू कुत्ता

सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य तब सामने आया, जब राहतकर्मियों ने देखा कि पीयूष के शव के बिल्कुल पास उसका पालतू कुत्ता मौजूद था। कड़ाके की ठंड, भूख-प्यास और बर्फीले तूफान के बावजूद कुत्ता न तो वहां से हटा और न ही अपने मालिक को अकेला छोड़ा। ऐसा लग रहा था मानो उसने अपने मालिक की आख़िरी सांस तक पहरा देने की जिम्मेदारी खुद उठा ली हो।

राहतकर्मियों को पास आने नहीं दे रहा था कुत्ता

जब राहत दल शव के करीब पहुंचा, तो कुत्ते ने किसी को पास नहीं आने दिया। वह लगातार गुर्राता रहा और शव के चारों ओर डटा रहा। राहतकर्मियों को काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी। बड़े संयम, धैर्य और सावधानी के साथ कुत्ते को कुछ दूरी पर ले जाया गया, तब जाकर शव को अपने कब्जे में लिया जा सका। इस दौरान वहां मौजूद कई अनुभवी जवान भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। बर्फीली खामोशी के बीच यह दृश्य हर आंख को नम कर गया।

कानूनी औपचारिकताएं

किशोर का शव बरामद होने के बाद प्रशासन ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वहीं, अन्य लापता युवकों की तलाश अब भी जारी है। हालांकि खराब मौसम, लगातार बर्फबारी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां अभियान में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

प्रशासन का बयान

भरमौर के उपमंडल अधिकारी (नागरिक) विकास शर्मा ने बताया कि मलकोता क्षेत्र में लगातार खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “दुर्गम परिस्थितियों और भारी बर्फबारी के बीच एक किशोर का शव बरामद हुआ है, जिसके पास उसका पालतू कुत्ता मौजूद था। पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों के सहयोग से अभियान जारी है। अन्य लापता युवकों की तलाश लगातार की जा रही है।”

पहाड़ों में कुदरत के आगे इंसान की बेबसी

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि पहाड़ों में मौसम कब जानलेवा रूप ले ले, कहा नहीं जा सकता। बर्फ, ठंड और सन्नाटे के बीच इंसान कितना बेबस हो जाता है, इसका यह दर्दनाक उदाहरण है। साथ ही, इस घटना ने यह भी साबित कर दिया कि वफ़ादारी और इंसानियत की सबसे ऊंची मिसाल कई बार एक बेज़ुबान जानवर पेश कर देता है।

वफ़ादारी की मिसाल बना पालतू कुत्ता

पीयूष का पालतू कुत्ता अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि उसने अपने मालिक के लिए मौत, ठंड और बर्फ तीनों से लड़ाई लड़ी। तीन दिनों तक बिना भोजन-पानी के शव के पास डटे रहना, किसी भी इंसान के लिए आसान नहीं, लेकिन एक बेज़ुबान ने यह कर दिखाया।

अटूट रिश्ते की मार्मिक कहानी

भरमौर के मलकोता क्षेत्र की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि इंसान और जानवर के बीच अटूट रिश्ते की मार्मिक कहानी है। जहां कुदरत के आगे इंसान हार गया, वहीं एक पालतू कुत्ता अपनी वफ़ादारी से अमर हो गया। यह कहानी न सिर्फ आंखें नम करती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि सच्ची इंसानियत और निष्ठा का अर्थ क्या होता है- चाहे वह किसी बेज़ुबान के रूप में ही क्यों न सामने आए।

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