हिमाचल में महिलाओं को तृतीय श्रेणी नौकरियों में 25% आरक्षण

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि राज्य सरकार सरकारी विभागों में तृतीय श्रेणी पदों की भर्ती में महिलाओं को 25 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए कानून लाएगी

Update: 2026-03-09 04:54 GMT

महिला दिवस पर सीएम सुक्खू का बड़ा ऐलान

  • नाहन मेडिकल कॉलेज को 500 करोड़, नई पाठ्यक्रमों की शुरुआत
  • महिला सम्मान राशि दोगुनी, विधवा पुनर्विवाह पर बढ़ी प्रोत्साहन राशि

शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि राज्य सरकार सरकारी विभागों में तृतीय श्रेणी पदों की भर्ती में महिलाओं को 25 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए कानून लाएगी। उन्होंने यह घोषणा महिला दिवस के अवसर पर नाहन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में की, जो सिरमौर जिले में रविवार को आयोजित हुआ।

मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला सब-इंस्पेक्टरों की विशेष भर्ती अभियान चलाने की भी घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान श्री सुक्खू ने नाहन मेडिकल कॉलेज के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कॉलेज को बेहतर आधारभूत ढांचे और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सशक्त किया जाएगा ताकि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हो सकें।

मुख्यमंत्री ने महिला सम्मान राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने की भी घोषणा की। इसके अलावा अगले शैक्षणिक सत्र से नाहन पीजी कॉलेज में एमएससी जूलॉजी, एमबीए और एमए इतिहास जैसे नए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं का कल्याण और सशक्तिकरण राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। उन्होंने बताया कि सरकार ने बेटियों को 150 बीघा तक की पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार सुनिश्चित किए हैं।

उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत विधवा महिलाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च राज्य सरकार उठा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि लाहौल-स्पीति जिले में इस समय पूरा प्रशासनिक नेतृत्व महिला अधिकारियों के हाथ में है, जबकि सिरमौर और हमीरपुर जिले के उपायुक्त भी महिलाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने महिलाओं की वैधानिक विवाह आयु 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दी है। साथ ही विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन राशि 65,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि पुलिस भर्ती में पहले ही महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया जा चुका है और सरकार अगले वर्ष से महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक पेंशन देने पर भी विचार कर रही है।

वित्तीय चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्री सुक्खू ने कहा कि 1 फरवरी 2026 हिमाचल प्रदेश के इतिहास में “काला दिवस” के रूप में दर्ज रहेगा क्योंकि केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाली 10,000 करोड़ रुपये की वार्षिक आरडीजी वित्तीय सहायता बंद कर दी है। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि उसके कार्यकाल में राज्य गुणवत्ता शिक्षा रैंकिंग में 21वें स्थान पर पहुंच गया था।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वर्तमान सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम कर रही है। इसके तहत सीबीएसई पैटर्न पर स्कूल शुरू किए गए हैं, जहां संगीत और ड्रॉइंग जैसे विषय भी पढ़ाए जाएंगे। इन स्कूलों के लिए शिक्षकों की भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है और अब तक सात प्रमुख गारंटियां पूरी कर चुकी है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 10,500 रुपये कर दिया गया है, जबकि आंगनवाड़ी सहायिकाओं को अब 5,800 रुपये मानदेय दिया जा रहा है।

वहीं स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने कहा कि बेटियां शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर रही हैं और समाज से लैंगिक भेदभाव खत्म कर महिलाओं को समान अवसर देने की अपील की। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी सामाजिक विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

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