'जीरो-फैट' का कॉन्सेप्ट बिगाड़ सकता है सेहत, जानें कितनी जरूरी है शरीर के लिए वसा

आज की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो गई है, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखने के नाम पर आजकल दुनियाभर में 'जीरो फैट' का कॉन्सेप्ट चल रहा है और लोग भेड़चाल की तरह इसे फॉलो भी कर रहे हैं।

By :  Deshbandhu
Update: 2026-02-22 04:37 GMT

नई दिल्ली। आज की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो गई है, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखने के नाम पर आजकल दुनियाभर में 'जीरो फैट' का कॉन्सेप्ट चल रहा है और लोग भेड़चाल की तरह इसे फॉलो भी कर रहे हैं।

वजन घटाने और खुद को तेल से बचाने की जंग में लोगों ने तेल या घी को अपनी जीवनशैली से लगभग खत्म कर दिया है। बाजार में भी 'लो-फैट' और 'जीरो-फैट' प्रोडक्ट का भी चलन शुरू हो चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 'जीरो-फैट' की अवधारणा शरीर के लिए कितनी हानिकारक है?

आयुर्वेद की मानें तो 'जीरो-फैट' की अवधारणा शरीर को सेहत नहीं, बल्कि बीमार कर रही है। अगर हम चिकनाई का इस्तेमाल कम करते हैं तो इसका असर मस्तिष्क और हमारी कोशिकाओं पर पड़ता है। वसा का काम सिर्फ ऊर्जा देना नहीं है, बल्कि कोशिकाओं को बनने में मदद करना भी है, लेकिन ध्यान देने वाली बात ये भी है कि यहां हम गुड फैट की बात कर रहे हैं, जिसे देशी घी, कच्ची घानी का तेल (सरसों, नारियल या तिल), अखरोट, बादाम और अलसी के बीज, एवोकाडो और जैतून का तेल से सीमित मात्रा में शामिल कर सकते हैं, न कि समोसे, पिज्जा या प्रोसेस्ड फूड वाले ऑयल की।

'जीरो-फैट' अवधारणा के उलट ये जानना भी जरूरी है कि क्यों आहार में ऑयल का सीमित मात्रा में प्रयोग जरूरी है। हमारे शरीर में कई ऐसे विटामिन होते हैं, जो वसा में घुलनशील होते हैं। ऐसे में बिना वसा के विटामिन ए, जी, ई और के का अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता है। अगर आप वसा को अपने आहार में शामिल नहीं करेंगे तो विटामिन भी प्रभावित होंगे।

साधारण अवधारणा है कि वसा का काम सिर्फ ऊर्जा देना है, लेकिन यह गलत है। गुड फैट, ओमेगा-3 फैटी एसिड, न्यूरॉन्स के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गुड फैट की कमी होने पर मस्तिष्क से जुड़े विकार हो सकते हैं। कम वसा खाने की वजह से अल्जाइमर और डिप्रेशन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

शरीर के दो सबसे जरूरी हॉर्मोन, टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन, को बनने के लिए भी वसा की जरूरत होती है। खासकर महिलाएं अगर गुड फैट लेना बंद कर देती हैं, तो उन्हें मासिक धर्म और प्रजनन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

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