भाजपा नेता की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने सीजेपी आंदोलन का किया समर्थन, नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर उठाए सवाल

भाजपा के पूर्व विधायक की बेटी यशस्विनी राजे सिंह ने सीजेपी के छात्र आंदोलन का समर्थन किया। नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी उठाए सवाल।;

Update: 2026-07-31 07:17 GMT

नई दिल्ली। वर्ष 2026 के नीट पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले छात्र आंदोलन के दौरान भाजपा के एक पूर्व विधायक की बेटी यशस्विनी राजे सिंह के बयान चर्चा का विषय बन गए हैं। कंटेंट क्रिएटर यशस्विनी ने न केवल 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन का खुलकर समर्थन किया, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उनके बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को बताया 'भद्दा मजाक'

यशस्विनी राजे सिंह उत्तर प्रदेश के पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की बेटी हैं। मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति उन्हें "एक भद्दा मजाक" जैसी लगी। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर संकट के बीच सरकार को ऐसा फैसला लेने से पहले व्यापक जवाबदेही दिखानी चाहिए थी।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की चिंताओं को केवल नेतृत्व परिवर्तन से दूर नहीं किया जा सकता, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा बहाल करने के लिए ठोस सुधारों की आवश्यकता है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भी जताई नाराजगी

यशस्विनी ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भाषा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस्तीफे में कहीं भी जिम्मेदारी स्वीकार करने या घटनाक्रम पर पछतावा दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार, पत्र की भाषा ऐसी प्रतीत होती है मानो किसी उपलब्धि का उल्लेख किया गया हो, जबकि छात्रों की नाराजगी और परीक्षा विवाद को गंभीरता से स्वीकार करना अधिक जरूरी था।

गौरतलब है कि छात्र आंदोलन के बाद सरकार ने कई मांगें स्वीकार की थीं, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया था।

सीजेपी के अभियान की रणनीति की सराहना

यशस्विनी ने छात्र आंदोलन चला रहे सीजेपी की कार्यशैली की भी सराहना की। उनके अनुसार, संगठन ने सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम और मीम्स का प्रभावी उपयोग कर बड़ी संख्या में युवाओं तक अपनी बात पहुंचाई। उनका मानना है कि इस रणनीति के कारण ऐसे युवा भी आंदोलन से जुड़े, जो सामान्यतः राजनीतिक या सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय नहीं रहते।

उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए छात्रों की आवाज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में CJP सफल रहा और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

पारिवारिक राजनीति से दूरी का किया दावा

यशस्विनी ने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक राय पूरी तरह व्यक्तिगत है और उसका उनके पिता की राजनीति से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पिछले साढ़े तीन वर्षों से अपने परिवार से अलग रह रही हैं और राजनीति के मुद्दों पर पिता से चर्चा भी नहीं करतीं।

उन्होंने बताया कि लंबे समय से उन्होंने अपने पिता के पूर्व निर्वाचन क्षेत्र फतेहपुर सदर का दौरा भी नहीं किया है। उनका कहना है कि राजनीतिक माहौल से दूरी बनाए रखने के कारण वह बिना किसी दबाव या झिझक के अपने विचार सार्वजनिक रूप से रख पाती हैं।

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