टीसीएस के बाद अब विप्रो में धर्मांतरण के दबाव का आरोप, पूर्व महिला कर्मचारी ने दर्ज कराई शिकायत
आईटी कंपनी विप्रो की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने कार्यस्थल पर धार्मिक उत्पीड़न और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। मामले की जांच पुणे पुलिस कर रही है, जबकि कंपनी ने जांच में सहयोग की बात कही है।;
नई दिल्ली। देश की प्रमुख आईटी कंपनी विप्रो एक विवाद के कारण चर्चा में आ गई है। कंपनी की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि नौकरी के दौरान उसे धार्मिक आधार पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। महिला ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले को मानवाधिकार संगठनों के समक्ष भी उठाया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह पुणे के हिंजेवाड़ी स्थित विप्रो परिसर से जुड़ी परियोजनाओं पर कार्यरत थीं। उनका आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और टीम लीडरों ने उन्हें धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया। महिला का कहना है कि उन पर एक विशेष धर्म को अपनाने और उससे जुड़े रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए लगातार मानसिक दबाव डाला गया।
विरोध करने पर बढ़ा उत्पीड़न का आरोप
महिला का दावा है कि जब उन्होंने कथित दबाव का विरोध किया, तो कार्यस्थल पर उनके प्रति व्यवहार और कठोर हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके प्रदर्शन पर सवाल उठाए गए और नौकरी से निकालने की धमकी भी दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, लगातार मानसिक तनाव और कथित उत्पीड़न के कारण उन्हें अंततः नौकरी छोड़नी पड़ी।
महिला ने कहा कि कंपनी के भीतर शिकायत करने के बावजूद उन्हें संतोषजनक राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने का निर्णय लिया।
पुणे पुलिस ने शुरू की जांच
मामले के सामने आने के बाद पुणे पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, शिकायत में महिला ने अपनी तत्कालीन अधिकारी पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने और बाद में इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। इसमें यह भी देखा जाएगा कि कंपनी ने शिकायत मिलने के बाद क्या कार्रवाई की और क्या आंतरिक स्तर पर निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। पुलिस कंपनी के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की भी समीक्षा कर रही है।
विप्रो ने जांच में सहयोग का भरोसा दिया
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विप्रो के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस को आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करा दी गई है।
कंपनी के अनुसार, कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रवक्ता ने कहा कि विप्रो कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के भेदभाव, उत्पीड़न या दुर्व्यवहार के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाती है और सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आईं शिकायतें
बताया गया है कि महिला ने हाल ही में पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्ष 2019 से 2025 के बीच नौकरी के दौरान कथित रूप से झेली गई परेशानियों का विस्तृत विवरण साझा किया। इसके बाद यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।
फिलहाल पुलिस शिकायतकर्ता के आरोपों, कंपनी के आंतरिक रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयानों की जांच कर रही है। अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।