बंगाल उपचुनाव में गिरफ्तारी से गरमाया माहौल, बेटे के लिए भी प्रचार नहीं करेंगे हुमायूं कबीर
पश्चिम बंगाल के रेजीनगर उपचुनाव से पहले AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने बेटे गुलाम नबी आजाद के लिए प्रचार से दूरी बनाई। जानें गिरफ्तारियों और विवाद की पूरी कहानी।;
हुमायूं कबीर ने क्यों छोड़ा प्रचार?
हुमायूं कबीर ने कहा कि वह रेजीनगर में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। उनके मुताबिक, पार्टी के कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है और ऐसे माहौल में वह मैदान में उतरकर प्रचार नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि फिलहाल मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाएगा।
कबीर ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप भी लगाया है। हालांकि, ये आरोप उनके राजनीतिक पक्ष के दावे हैं और पुलिस की कार्रवाई अलग-अलग मामलों में दर्ज मुकदमों और जांच से जुड़ी बताई गई है।
बेटे गुलाम नबी आजाद का भी प्रचार से दूरी का फैसला
हुमायूं कबीर के ऐलान के बाद उनके बेटे और AJUP प्रत्याशी गुलाम नबी आजाद ने भी चुनाव प्रचार से दूरी बनाने की बात कही। आजाद का कहना है कि पार्टी के हित में उनके पिता ने जो फैसला लिया है, वह उन पर भी लागू होता है।
रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दो सीटों से जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में उन्होंने नाओदा सीट बरकरार रखते हुए रेजीनगर छोड़ दी थी। इसके बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।
AJUP से जुड़े उम्मीदवार की भी गिरफ्तारी
उपचुनाव से ठीक पहले रेजीनगर में एक और गिरफ्तारी ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है। पुलिस के अनुसार, निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम को 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दो गुटों के बीच हुई झड़प से जुड़े पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, सैफुल का संबंध हुमायूं कबीर की AJUP से बताया जाता है।
इससे पहले AJUP के अन्य नेताओं की गिरफ्तारियों को लेकर भी कबीर ने सवाल उठाए थे। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि संबंधित मामलों की जांच जारी है।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी भी चर्चा में
नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी भी राजनीतिक बहस का मुद्दा बनी हुई है। पुलिस ने उन्हें 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में लंबित वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस इसे लंबित मामलों में कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।
इस तरह रेजीनगर और नंदीग्राम दोनों उपचुनावों में उम्मीदवारों और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई, पुराने मामलों और प्रचार को लेकर उठे विवाद ने चुनावी मुकाबले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।