पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 24 जुलाई को तीन सीटों पर मतदान; चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा शेड्यूल

पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई 2026 को उपचुनाव होगा। जानिए चुनाव आयोग द्वारा जारी पूरा शेड्यूल, नामांकन की तारीखें, मतदान के नियम और चुनाव प्रक्रिया।;

Update: 2026-07-06 06:52 GMT

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान होने के साथ ही राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। भारतीय चुनाव आयोग ने इन सीटों के लिए 24 जुलाई 2026 को मतदान कराने की घोषणा की है। मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन मतगणना भी कराई जाएगी। ये तीनों सीटें वरिष्ठ नेताओं सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। आयोग के अनुसार पूरी चुनाव प्रक्रिया 27 जुलाई 2026 तक पूरी कर ली जाएगी।

7 जुलाई से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया

चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 7 जुलाई 2026 को अधिसूचना जारी होने के साथ उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार 14 जुलाई तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 15 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी, जबकि 17 जुलाई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे।

यदि चुनाव की आवश्यकता हुई तो 24 जुलाई को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा। इसके तुरंत बाद शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।

तीनों सीटें इस्तीफों के बाद हुई थीं रिक्त

चुनाव आयोग के अनुसार, राज्यसभा की ये तीनों सीटें अलग-अलग तिथियों पर रिक्त हुई थीं। वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर राय ने 8 जून 2026 को इस्तीफा दिया था। इसके बाद सुष्मिता देव ने 10 जून और प्रकाश चिक बराइक ने 11 जून 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा। तीनों इस्तीफों के बाद राज्यसभा में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करने वाली ये सीटें खाली हो गई थीं।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक सीट के लिए अलग-अलग उपचुनाव की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और सभी सीटों के लिए अलग अधिसूचना जारी की जाएगी।

मतदान के लिए जारी किए गए विशेष दिशा-निर्देश

चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश भी जारी किए हैं। आयोग के मुताबिक मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराया गया विशेष बैंगनी (वॉयलेट) रंग का पेन ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी अन्य पेन से डाला गया मत नियमों के अनुसार अमान्य माना जा सकता है।

इसके अलावा मतदान की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों (ऑब्जर्वर्स) की नियुक्ति की जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न हो सके।

राजनीतिक दलों की नजर उम्मीदवारों के चयन पर

तीनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी प्रमुख दलों की नजर उम्मीदवारों के चयन पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि इन सीटों पर उम्मीदवारों के चयन के जरिए आगामी राजनीतिक रणनीति और राज्यसभा में दलों की स्थिति का भी संकेत मिलेगा।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और न्यायालय के पूर्व आदेशों के अनुरूप प्रत्येक रिक्त सीट के लिए अलग मतदान कराया जाएगा। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से आचार संहिता और चुनावी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है, ताकि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके।

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