बांकीपुर से चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर, जन सुराज ने किया उम्मीदवार घोषित; सोशल मीडिया पर छिड़ी सियासी जंग

प्रशांत किशोर ने पार्टी नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से जन सुराज ही उनके जीवन का सबसे बड़ा मिशन रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास करेंगे।;

Update: 2026-07-06 03:44 GMT

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी ने राजधानी पटना की सबसे चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने आधिकारिक तौर पर उनके नाम की घोषणा की। इसके साथ ही बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल बांकीपुर का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। घोषणा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 'बिहार रिजेक्ट PK' ट्रेंड करने लगा, जिसने इस चुनावी मुकाबले को डिजिटल बहस का भी केंद्र बना दिया।

जिम्मेदारी निभाने का भरोसा, बदलाव का किया दावा

उम्मीदवारी घोषित होने के बाद प्रशांत किशोर ने पार्टी नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से जन सुराज ही उनके जीवन का सबसे बड़ा मिशन रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि बांकीपुर की जनता उन्हें जीत दिलाती है तो इससे केवल एक सीट नहीं जीती जाएगी, बल्कि जन सुराज का मनोबल मजबूत होगा और बिहार की राजनीति में एक नए विकल्प को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में वास्तविक परिवर्तन आने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

मतदाताओं से किया सीधा संवाद

प्रशांत किशोर ने वर्ष 2025 के चुनाव में जन सुराज का समर्थन करने वाले मतदाताओं का धन्यवाद करते हुए बांकीपुर की जनता से भरोसा जताने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि जनता जन सुराज के प्रतिनिधि को विधानसभा भेजती है तो वह प्रभावी तरीके से जनता की आवाज उठाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नई दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने मतदाताओं से जाति और दल से ऊपर उठकर ईमानदार नेतृत्व चुनने की अपील की।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर बोला हमला

उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी जनता के प्रत्यक्ष जनादेश से नहीं, बल्कि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता का मूल्यांकन अंततः जनता ही करती है और वही तय करेगी कि कौन बेहतर विकल्प है। उन्होंने यह भी कहा कि बांकीपुर का चुनाव सरकार बदलने का नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नई सोच और नए विकल्प को स्थापित करने का चुनाव है।

पहले से चल रही थी चुनाव लड़ने की चर्चा

दरअसल, नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद से ही बांकीपुर सीट खाली होने की स्थिति बनी थी और तभी से प्रशांत किशोर के यहां से चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज थीं। कुछ दिन पहले उन्होंने स्वयं संकेत दिया था कि यदि उनके चुनाव लड़ने से भाजपा जैसी मजबूत पार्टी को चुनौती मिलती है, तो वह मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। अब पार्टी ने औपचारिक घोषणा कर उन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

भाजपा ने नहीं खोले पत्ते, कई नाम चर्चा में

हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक बांकीपुर सीट से अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा तेज है। सबसे प्रमुख नाम भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता नील रतन घोष (नीलू दा) का बताया जा रहा है। नील रतन घोष लंबे समय तक पूर्व विधायक और वर्तमान राज्यसभा सांसद नितिन नवीन के करीबी सहयोगी रहे हैं। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है।

अजय आलोक भी संभावित दावेदार

बांकीपुर सीट के लिए भाजपा के संभावित उम्मीदवारों में राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक का नाम भी चर्चा में है। मीडिया में भाजपा के मुखर चेहरों में शामिल अजय आलोक पहले लोक जनशक्ति पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा था। राजनीतिक अनुभव, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि और पटना में उनकी पहचान को देखते हुए उन्हें भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

हाई-प्रोफाइल मुकाबले पर सबकी नजर

बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रशांत किशोर की एंट्री ने चुनावी मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है। अब सभी की निगाहें भाजपा के उम्मीदवार पर टिकी हैं। यदि भाजपा किसी मजबूत चेहरे को मैदान में उतारती है, तो यह मुकाबला बिहार विधानसभा चुनाव का सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित चुनाव बन सकता है। साथ ही यह चुनाव जन सुराज की राजनीतिक स्वीकार्यता और प्रशांत किशोर की जनाधार क्षमता की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

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