यूपी में आकार लेगी 'केयर इकोनॉमी', बुजुर्गों-दिव्यांगों की देखभाल से युवाओं को मिलेगा रोजगार, 12 विभाग मिलकर बनाएंगे रोडमैप

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार केयर इकोनॉमी को रोजगार का नया क्षेत्र बनाने की तैयारी कर रही है। 12 विभाग मिलकर केयर सेक्टर का राज्य स्तरीय रोडमैप तैयार करेंगे।;

Update: 2026-09-15 12:01 GMT
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और अन्य जरूरतमंद लोगों की देखभाल अब सिर्फ पारिवारिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे रोजगार और आजीविका के एक संगठित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। योगी सरकार ने ‘केयर इकोनॉमी’ को रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू की है। इसके तहत राज्य में एक व्यापक केयर इकोनॉमी रोडमैप तैयार किया जाएगा।

इसी क्रम में सोमवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में समाज कल्याण विभाग की नोडल भूमिका में राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का विषय ‘सतत केयर इकोनॉमी का निर्माण, देखभाल कार्य को पहचान, महिलाओं को सशक्तीकरण और समावेशी आजीविका के अवसर’ रहा। इसमें सरकारी विभागों और विशेषज्ञों ने केयर सेक्टर को व्यवस्थित और टिकाऊ बनाने पर मंथन किया।

केयर इकोनॉमी बनेगी रोजगार का नया आधार

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से केयर इकोनॉमी प्रदेश में रोजगार सृजन और बुजुर्गों तथा वंचित वर्गों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुशल केयरगिवर्स तैयार करने के साथ उन्हें प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया जाए तो यह क्षेत्र युवाओं और विशेष रूप से महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका का माध्यम बन सकता है।

मंत्री के मुताबिक डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर केयर सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सकता है। कार्यशाला से मिलने वाले सुझाव राज्य केयर अर्थव्यवस्था का रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।

12 विभाग मिलकर तैयार करेंगे साझा रणनीति

केयर इकोनॉमी को केवल एक विभाग तक सीमित रखने के बजाय 12 प्रमुख सरकारी विभागों को इसके साथ जोड़ा गया है। कार्यशाला में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, श्रम, कौशल विकास और दिव्यांगजन सशक्तीकरण सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।

इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों की योजनाओं, बजट और संसाधनों को एक साझा रणनीति के तहत जोड़ना है। इससे घरेलू और अनौपचारिक देखभाल कार्य को भी आर्थिक गतिविधि के रूप में पहचान देने की दिशा में काम किया जा सकेगा।

चार स्तंभों पर फोकस, महिलाओं को मिलेंगे नए अवसर

कार्यशाला में केयर इकोनॉमी के चार प्रमुख पहलुओं पर विशेष चर्चा हुई। पहला, घरेलू और अनौपचारिक देखभाल कार्य के आर्थिक मूल्य को पहचान देना। दूसरा, महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना। तीसरा, केयरगिवर्स के लिए मानक प्रशिक्षण और प्रमाणन की व्यवस्था विकसित करना और चौथा, इस क्षेत्र को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए नए वित्तीय मॉडल तैयार करना।

इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), बीमा योजनाओं और CSR फंड के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशने पर जोर दिया गया।

प्रशिक्षित केयरगिवर्स को मिलेगा सम्मानजनक रोजगार

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने कहा कि केयर इकोनॉमी सामाजिक जरूरत के साथ रोजगार का तेजी से उभरता क्षेत्र भी है। प्रशिक्षित और प्रमाणित केयरगिवर्स उपलब्ध होने से जरूरतमंद परिवारों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और युवाओं, खासकर महिलाओं को सम्मानजनक तथा टिकाऊ रोजगार के अवसर मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से लेकर प्रमाणन और रोजगार तक पूरी व्यवस्था को विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ विकसित करने की जरूरत है। कार्यक्रम में यूपी सिडको के चेयरमैन वाई.पी. सिंह, महिला एवं बाल विकास सचिव मनीषा त्रिघाटिया, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव सहित स्वास्थ्य, वित्त, कौशल विकास और दिव्यांग कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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