संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर भारत का पलटवार, कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे पर पेटल गहलोत ने दिया करारा जवाब

UNGA 81 में शहबाज शरीफ के बयान के बाद भारत ने राइट टू रिप्लाई में पाकिस्तान को जवाब दिया। पेटल गहलोत ने आतंकवाद, कश्मीर और मानवाधिकारों पर भारत का पक्ष रखा।;

Update: 2026-09-26 04:13 GMT
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर कूटनीतिक जुबानी जंग देखने को मिली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर और भारत के साथ संबंधों से जुड़े मुद्दे उठाए। इसके बाद भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने Right to Reply के तहत पाकिस्तान के बयान का जवाब दिया।

भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर इस्लामाबाद के रिकॉर्ड का हवाला दिया। गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयानों और उसके व्यवहार के बीच अंतर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ओसामा बिन लादेन का मुद्दा उठाया

पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए ओसामा बिन लादेन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 9/11 हमलों का मुख्य आरोपी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में लंबे समय तक रहा और 2011 में अमेरिकी अभियान में मारा गया।

भारत ने इस तथ्य को पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी दावों के संदर्भ में उठाया। गहलोत ने पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य व्यवस्था को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि सत्ता में बदलाव के बावजूद वास्तविक निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल बने हुए हैं।

‘दिन में शांति, रात में आतंकवाद’ का आरोप

भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान पर आतंकवाद और सुरक्षा को लेकर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक तरफ शांति और सुरक्षा की बात करता है, जबकि भारत के अनुसार उसकी धरती या उसके प्रभाव वाले क्षेत्रों से भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलता रहा है।

भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भी पाकिस्तान के रुख पर सवाल उठाया। गहलोत ने कहा कि जिस देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं, उसे दूसरे देशों को मानवाधिकारों पर उपदेश देने से पहले अपने रिकॉर्ड पर ध्यान देना चाहिए।

कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख

पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। गहलोत ने इसके बजाय पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया और वहां मानवाधिकारों की स्थिति पर सवाल किए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद की नीति ने क्षेत्र में लंबे समय से अस्थिरता पैदा की है। वहीं पाकिस्तान अपने UNGA रुख में जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्णय के अधिकार से जोड़ता रहा है। पाकिस्तान ने 81वें UNGA सत्र से पहले भी कहा था कि शहबाज शरीफ अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर और फिलिस्तीन के मुद्दे उठाएंगे।

आतंकवाद के खिलाफ भारत ने दोहराया आत्मरक्षा का अधिकार

भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वह अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करता रहेगा। गहलोत ने कहा कि आतंकवाद के लिए जिम्मेदार लोगों और उन्हें समर्थन देने वाली नीतियों के परिणाम होंगे।

इससे पहले भी UN मंच पर पेटल गहलोत भारत-पाकिस्तान विवाद और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष रख चुकी हैं। मौजूदा UNGA में दोनों देशों के बयानों से साफ है कि जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों के रुख में अभी भी गहरा अंतर बना हुआ है।

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