ममता बनर्जी को हटाकर अरूप रॉय बने अध्यक्ष, बागी नेताओं ने दिया सलाहकार बनने का प्रस्ताव
तृणमूल कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक संकट। बागी नेताओं ने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाकर अरूप रॉय को नया अध्यक्ष बनाया। ममता को मुख्य सलाहकार बनने का प्रस्ताव भी दिया गया।;
अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना, ममता के लिए नरम रुख
बागी नेताओं की बैठक के बाद सामने आए बयान में स्पष्ट किया गया कि उनका मुख्य विरोध पार्टी की मौजूदा कार्यशैली और नेतृत्व संरचना को लेकर है। बागी खेमे के प्रमुख चेहरों में शामिल रिताब्रता बनर्जी ने कहा कि यदि ममता बनर्जी संगठन की मुख्य सलाहकार की जिम्मेदारी स्वीकार करना चाहें तो उनका स्वागत किया जाएगा। हालांकि उन्होंने सांसद अभिषेक बनर्जी पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा कि बैठक में उनके बारे में कोई चर्चा तक नहीं हुई।
रिताब्रता ने सवालिया लहजे में कहा, “अभिषेक कौन हैं?” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन न होने के बाद से ही अभिषेक की रणनीति और नेतृत्व शैली पर सवाल उठते रहे हैं।
विशेष अधिवेशन में हुआ नया नेतृत्व चयन
न्यू टाउन स्थित एक होटल में आयोजित विशेष अधिवेशन में बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में संगठन के नए पदाधिकारियों की घोषणा की गई। सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष चुना गया।
इसके अलावा फिरहाद हाकिम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं रिताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
निर्वाचन आयोग का रुख कर सकता है बागी गुट
बागी नेताओं ने दावा किया कि वही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को विशेष अधिवेशन की कार्यवाही और नए संगठनात्मक ढांचे की जानकारी सौंपी जाएगी। इससे पार्टी के चुनाव चिह्न और वैधता को लेकर नई कानूनी लड़ाई शुरू होने की संभावना है।
विधायकों और सांसदों में टूट से बढ़ी मुश्किलें
बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी में असंतोष बढ़ा और अब 64 से अधिक विधायक बागी खेमे के साथ खड़े हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के पास सीमित संख्या में विधायक बचे होने की चर्चा है।
दिल्ली में भी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। लोकसभा में टीएमसी के कई सांसदों ने अलग राह पकड़ ली है, जबकि राज्यसभा में भी कई सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। इससे पार्टी की संसदीय ताकत में लगातार कमी आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी गुट निर्वाचन आयोग में अपनी दावेदारी पेश करता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।