छात्रों को सीजेपी प्रदर्शनों से दूर रहने का आदेश, विवाद के बाद तमिलनाडु में विजय की पार्टी ने लिया यू-टर्न

तमिलनाडु में छात्रों को सीजेपी और वामपंथी संगठनों के प्रदर्शनों से दूर रखने वाले आदेश पर विवाद हुआ। विरोध के बाद टीवीके ने आदेश वापस ले लिया।;

Update: 2026-08-19 07:16 GMT
चेन्नई। तमिलनाडु में छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों और आंदोलनों से दूर रखने के एक आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विजय थलपति के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) से जुड़े निर्देश में छात्रों और युवाओं को वामपंथी संगठनों तथा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले होने वाले प्रदर्शनों में शामिल नहीं होने की बात कही गई थी। विरोध बढ़ने के बाद इस आदेश को वापस ले लिया गया।

छात्रों को प्रदर्शन से दूर रखने का था निर्देश

बताया गया कि शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों तथा युवाओं को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया था। इसमें विशेष तौर पर वामपंथी दलों और सीजेपी से जुड़े आंदोलनों, प्रदर्शनों तथा हड़तालों का उल्लेख किया गया था।

आदेश सामने आने के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच प्रतिक्रिया तेज हो गई। आलोचकों ने इसे छात्रों की अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए।

सीजेपी ने बताया निंदनीय और असंवैधानिक

आदेश पर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने इसे निंदनीय और असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध या प्रदर्शन करने से रोकना उचित नहीं है।

सीजेपी ने आरोप लगाया कि छात्रों को किसी खास संगठन या विचारधारा से जुड़े प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने का निर्देश लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है। संगठन ने सरकार से आदेश वापस लेने की मांग भी की।

विरोध के बाद टीवीके ने बदला फैसला

विवाद बढ़ने और आदेश को लेकर सवाल उठने के बाद टीवीके ने अपना रुख बदलते हुए संबंधित निर्देश वापस ले लिया। इससे साफ है कि सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विवाद को आगे बढ़ने से रोकने का फैसला किया है।

फिलहाल आदेश वापस लिए जाने के बाद छात्रों और राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रियाओं पर नजर बनी हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तमिलनाडु में छात्र राजनीति और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बहस तेज है।

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