किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम नहीं करने दूंगा, NCERT के नए सिलेबस को लेकर भड़के सीजेआई

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के तौर पर, उन्होंने अपना फर्ज निभाया है और इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है।

Update: 2026-02-25 05:57 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दे को एक किताब में शामिल किए जाने के मामले में अहम टिप्पणी की है। न्यायपालिका पर पाठ्यपुस्तक के एक अध्याय पर टिप्पणी करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वे किसी को भी संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते।

कक्षा 7 की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक की इस सामग्री से जुड़े विवाद का स्वतः संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।' इस मामले में अदालत के समक्ष पेश हुए वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, 'एनसीईआरटी कक्षा 8 के छात्रों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ा रही है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।'

 मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान इस कदम पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि वे किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम नहीं करने देंगे। वहीं जस्टिस बागची ने इसे संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ बताया है। बुधवार को न्यायपालिका पर आधारित पाठ्यपुस्तक के अध्याय पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ''संस्था के प्रमुख के रूप में मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है।… मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।

सीजेआई ने जताई नाराजगी

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मैं इस संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है।” उन्होंने संकेत दिया कि यह एक सुनियोजित और सोची-समझी कोशिश लगती है। उन्होंने कहा कि वह इस पर अभी ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उचित कदम उठाए जाएंगे।

वरिष्ठ वकीलों ने उठाया मुद्दा

कपिल सिब्बल ने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि ऐसी सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका को लेकर गलत संदेश दे सकती है। सीजेआई ने दोनों वरिष्ठ वकीलों का धन्यवाद किया कि उन्होंने इस विषय को अदालत के संज्ञान में लाया।

क्या है विवाद का मूल कारण

एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के एक अध्याय में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक से सामग्री जोड़ी गई है। इसी हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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