स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते, सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलने से इनकार

देश में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के बढ़ते आतंक और उनके हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने इस मुद्दे से जुड़ी सभी नई याचिकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।;

Update: 2026-05-19 05:37 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपना पुराना आदेश वापस लेने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थलों से हटाकर आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने का आदेश बरकरार रखा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में बदलाव की मांग खारिज की। शीर्ष अदालत ने डॉग लवर्स की याचिका को खारिज कर दिया है।

पीठ ने अपने आदेश में ये भी कहा कि अब आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोगों यानी डॉग फीडर्स और डॉग लवर्स की जिम्मेदारी भी तय होगी। अगर कोई कुत्ता किसी व्यक्ति को काटता है, तो ऐसे मामलों में जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की ही नहीं बल्कि उन लोगों की भी मानी जाएगी जो कुत्तों की देखभाल या फीडिंग में शामिल हैं।

स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक जगहों से कुत्तो को हटाने के आदेश में बदलाव की मांग वाली डॉग लवर्स की अर्जियों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया। इसका मतलब है कि स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक जगहों से कुत्तो को हटाने का SC का आदेश बरकरार रहेगा।

नवंबर 2025 के आदेश में संशोधन से साफ इनकार

जस्टिस की पीठ ने इस मामले में डॉग लवर्स (Dog Lovers) की ओर से दायर याचिका को भी खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने नवंबर 2025 के पुराने फैसले में किसी भी तरह का संशोधन या बदलाव करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों को चिन्हित क्षेत्रों से हटाने और उनके प्रबंधन को लेकर जो आदेश पहले दिया गया था, वह पूरी तरह लागू रहेगा और उसमें कोई ढील नहीं दी जाएगी।

अस्पताल, स्कूल और स्टेशनों पर लागू रहेगा नियम

सर्वोच्च अदालत ने राज्यों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सभी राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (Animal Birth Control – ABC) नियमों का सख्ती से पालन करें। इसके साथ ही कोर्ट ने दोहराया कि अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को दूर रखने का पुराना आदेश सख्ती से प्रभावी रहेगा। कोर्ट के इस रुख से साफ है कि आवारा कुत्तों के हमलों से आम जनता को सुरक्षा देना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसले में कहा था कि आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाए जाएं। उन्हें खुली जगहों पर खाना ना खइलाया जाए और सरकारी संस्थानों और खुली जगहों से उन्हें हटाया जाए। कोर्ट ने कहा कि देशभर में कुत्ता काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं और ऐसे में इस आदेश में कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी से निपटने के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु निरंतर प्रयास नहीं किए गए। इसके अलावा 'पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम' का कार्यान्वयन देशभर में अब भी बिखरे हुए, अपर्याप्त वित्तपोषण और अलग-अलग क्षेत्रों में असमान तरीके से हो रहा है।

कुत्तों की नसबंदी जरूरी

सु्प्रीम कोर्ट ने कहा कि 2001 में एबीसी रूल लागू किया गया था। लेकिन आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ी और उस अनुपात में शेल्टर होम और अन्य सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की नसबंदी जरूरी है। नगर नगम आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी करे। सामान्य कुत्तों को वैक्सिनेशन और स्टरलाइजेन के बाद उसी इलाके में छोड़ दिया जाए, जहां से उसे पकड़ा गया था।

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