जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन के स्थान को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान तय करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। सीजेआई सूर्यकांत ने मामले को गंभीर और महत्वपूर्ण बताया।;

Update: 2026-08-03 06:48 GMT

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। याचिका में मांग की गई है कि जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है और इसके लिए कोई वैकल्पिक स्थान तय किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने इसे एक गंभीर और महत्वपूर्ण विषय बताते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा।

याचिका में उठाए गए कई अहम मुद्दे

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शनों के कारण आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके अलावा एंबुलेंस, मेडिकल सेवाओं और अन्य आवश्यक आपूर्ति पर भी असर पड़ता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए ऐसी जगह तय की जानी चाहिए, जहां लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान भी बना रहे और आम जनता को अनावश्यक परेशानी का सामना भी न करना पड़े।

सीजेआई सूर्यकांत बोले- यह महत्वपूर्ण विषय

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे गंभीर प्रकृति के हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि यदि किसी स्थान पर लगातार प्रदर्शन होने से आम नागरिकों की आवाजाही और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इस विषय पर विचार किया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल से इस मामले में केंद्र सरकार के निर्देश प्राप्त करने को कहा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को औपचारिक नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले की अलग से विस्तृत सुनवाई की जाएगी, ताकि सभी पक्षों की दलीलें सुनी जा सकें।

लोकतांत्रिक अधिकार और जनसुविधा के बीच संतुलन पर होगी चर्चा

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले कुछ वर्षों में जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य इलाकों में विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा कई बड़े विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। ऐसे आयोजनों के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई लोकतांत्रिक अधिकारों और आम जनता की सुविधा के बीच संतुलन बनाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकती है। अदालत के अंतिम निर्णय से भविष्य में विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थानों और उनके प्रबंधन को लेकर नई दिशा मिल सकती है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केवल केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मामले पर अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई और सभी पक्षों की दलीलों के बाद ही लिया जाएगा।

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