सुल्तानपुर कोर्ट ने राहुल गांधी को 20 फरवरी को पेश होने का दिया आदेश

कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में 20 फरवरी को पेश होने का अंतिम मौका दिया है। यह मामला 8 साल पहले कर्नाटक चुनाव में अमित शाह पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है।

Update: 2026-01-19 08:43 GMT

सुल्तानपुर। यूपी के सुल्तानपुर कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानि के एक मामले में 20 फरवरी को पेश होने का अंतिम मौका दिया है। यह मामला 8 साल पहले कर्नाटक चुनाव में अमित शाह पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है, जिस पर भाजपा नेता विजय मिश्रा ने परिवाद दर्ज किया था। कोर्ट ने व्यक्तिगत बयान दर्ज करवाने का आदेश दिया था। राहुल गांधी फिलहाल जमानत पर हैं।

क्या है मामला

सुल्तानपुर के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के हनुमानगंज के निवासी भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अक्टूबर 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। वादी का आरोप है कि अगस्त 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

इस मामले में पिछले सात वर्षों से अधिक समय से सुनवाई चल रही है। राहुल गांधी के कोर्ट में पेश न होने पर दिसंबर 2023 में तत्कालीन न्यायाधीश ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था।

राहुल गांधी ने अदालत में खुद को निर्दोष बताए थे 

इसके बाद 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी ने अदालत में उपस्थित हुए, जहां विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत दी थी।

26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराते हुए खुद को निर्दोष बताया और इस मुकदमे को राजनीतिक साजिश करार दिया था। इसके बाद कोर्ट ने वादी पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसके तहत लगातार गवाह पेश किए जा रहे हैं।

राहुल गांधी का वो बयान, जिसे लेकर विवादों में घिरे

केस करने वाले भाजपा नेता विजय मिश्र के वकील संतोष पांडेय ने बताया- 8 मई 2018 को बेंगलुरु में कर्नाटक चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने कहा था, ‘‘अमित शाह हत्या के आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने खुद लोया मामले में इसका उल्लेख किया। इसलिए मुझे नहीं लगता कि अमित शाह की कोई विश्वसनीयता है। जो पार्टी ईमानदारी और शुचिता की बात करती है, उसका अध्यक्ष हत्या का आरोपी है।"

बता दें कि स्पेशल कोर्ट जज बृजमोहन हरकिशन लोया की मौत दिसंबर 2014 में नागपुर में हुई थी। उस वक्‍त वह अपने एक साथी की बेटी की शादी में गए थे। जज लोया गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे। इसमें अमित शाह आरोपी थे। हालांकि लोया के बेटे ने अपने पिता की मौत को नेचुरल बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे सामान्य मौत बताते हुए मामले की SIT जांच से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी।

मानहानि का केस करने वाले बोले- बयान से भावनाएं आहत हुईं

इस मामले में याचिकाकर्ता विजय मिश्र ने दैनिक भास्कर को बताया था कि राहुल के बयान से उनकी भावनाएं आहत हुईं, क्योंकि वे खुद भाजपा से जुड़े हुए थे। उनकी भी समाज में मानहानि हुई है। इसलिए उन्होंने कोर्ट में इस मामले को लेकर केस दायर किया था।

विजय मिश्र ने रामचंद्र और अनिल मिश्र को बतौर गवाह पेश किया था। विजय मिश्र ने सबूत के तौर पर यूट्यूब और अन्य वेबसाइट्स पर चले राहुल के बयान को पेश किया था। उन्होंने कहा था कि गवाहों के बयान और अन्य सबूत से राहुल को कोर्ट में तलब करने के पर्याप्त सबूत हैं।

राहुल के खिलाफ दो धाराएं राहुल गांधी पर इस मामले में धारा 499 और 500 में केस दर्ज है। धारा 499 के मुताबिक किसी के बारे में झूठी अफवाहें फैलाना, टिप्पणी करना, उसकी मानहानि करना है। वहीं धारा 500 में मानहानि के लिए दंड का प्रावधान है। इस मामले में राहुल को दो साल तक की जेल हो सकती है।

मानहानि केस में ही संसद सदस्यता रद्द हुई थी

24 मार्च 2023 को राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। उन्हें सूरत कोर्ट ने मानहानि केस में दो साल की सजा सुनाई थी। राहुल तब वायनाड से सांसद थे। हालांकि, बाद में सजा निलंबित होने के बाद राहुल की सदस्यता बहाल कर दी गई थी।

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