राहुल गांधी से जूस पिलवाकर अनशन खत्म करना चाहते थे सोनम वांगचुक, बोले- 20 जुलाई को संसद मार्च का था ये प्लान

सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई के संसद मार्च की रणनीति बताते हुए कहा कि वह राहुल गांधी से जूस पिलवाकर अनशन खत्म करना चाहते थे। उन्होंने आंदोलन के शांतिपूर्ण प्लान का खुलासा किया।;

Update: 2026-08-30 06:39 GMT

लद्दाख। नीट पेपर लीक के खिलाफ चलाए गए आंदोलन और 20 जुलाई को संसद की ओर प्रस्तावित मार्च को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने प्लान के बारे में विस्तार से बताया है। 36 दिनों तक अनशन करने वाले वांगचुक ने कहा कि उनकी कोशिश आंदोलन को शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से समाप्त करने की थी। वह चाहते थे कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी उन्हें जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाएं।

वांगचुक के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की योजना संसद पहुंचकर सांसदों को ज्ञापन सौंपने और उनसे इस मुद्दे को संसद में उठाने की अपील करने की थी। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी तरह की तोड़फोड़ या हिंसा करना नहीं था।

20 जुलाई को संसद मार्च का क्या था प्लान?

सोनम वांगचुक ने बताया कि आंदोलन के दौरान उन्होंने कहा था कि वह करीब 12 दिन और किसी तरह अनशन जारी रख सकते हैं, लेकिन 20 जुलाई को संसद जाकर सांसदों को ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इसके लिए प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या का अनुमान भी लगाया गया था।

उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने करीब 10 हजार तो कुछ ने 15 हजार प्रदर्शनकारियों के आने का अनुमान जताया था। हालांकि, उनके मुताबिक वास्तविक संख्या उम्मीद से कहीं अधिक हो सकती थी।

वांगचुक ने कहा कि उनकी योजना थी कि अगर सत्ता पक्ष की ओर से कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत के लिए नहीं आता है तो वे विपक्षी सांसदों से मिलेंगे। उनके मुताबिक विपक्ष के नेता आंदोलनकारियों का स्वागत करें और संसद के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान निकालने की जिम्मेदारी लें, ऐसी उम्मीद थी।

‘राहुल गांधी जूस पिलाकर अनशन तुड़वाएं’

वांगचुक ने कहा कि वह चाहते थे कि आंदोलन का समापन सम्मानजनक तरीके से हो। उनका विचार था कि अगर सरकार की तरफ से कोई बातचीत नहीं होती है तो विपक्ष के नेता राहुल गांधी उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाएं।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कभी नहीं सोचा था कि आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ होगी। उनकी सोच थी कि वे संसद तक जाकर अपनी बात सांसदों के सामने रखेंगे और इसके बाद आंदोलन की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों को सौंप देंगे।

18 जुलाई को हिरासत में लिए जाने का दावा

वांगचुक ने बताया कि 18 जुलाई को उन्हें जबरन वहां से ले जाया गया। उनके अनुसार, इसके बाद आंदोलन को लेकर बनाई गई रणनीति प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा थी कि सरकार या विपक्ष के किसी प्रतिनिधि के साथ बातचीत के जरिए अनशन खत्म हो।

अभिजीत दीपके ने भी बताई स्थिति

आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने एक इंटरव्यू में कहा कि सोनम वांगचुक आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे और उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता थी। दीपके के मुताबिक, वांगचुक अनशन खत्म करने के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि बाद में वांगचुक को जबरन ले जाया गया और उनसे केवल सरकारी लोग ही मिल पा रहे थे।

दीपके का कहना था कि आंदोलनकारियों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई और अंततः वांगचुक को खुद ही अनशन समाप्त करना पड़ा।

Tags:    

Similar News