रुद्रप्रयाग में तनाव बरकरार: नगरासू गुरुद्वारे में निहंगों का हंगामा, पुलिस-आईटीबीपी तैनात, इंटरनेट सेवा प्रभावित

रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद के बाद तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। पुलिस, आईटीबीपी और प्रशासन मौके पर तैनात हैं, जबकि इंटरनेट सेवा भी प्रभावित की गई है।;

Update: 2026-06-21 04:31 GMT

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में शनिवार को तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए विवाद की पृष्ठभूमि में शुरू हुआ यह मामला अब प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और आईटीबीपी की टीमें लगातार मौके पर तैनात हैं, जबकि क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित की गई हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार गुरुद्वारे के भीतर मौजूद निहंगों को बाहर निकालने का प्रयास जारी है, लेकिन वे बाहर आने को तैयार नहीं हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

मारपीट और बंधक बनाने के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ निहंगों ने गुरुद्वारे के सेवादार और एक साधु के साथ मारपीट की। इसके अलावा एक व्यक्ति को काफी समय तक बंधक बनाए रखने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया।

घटना के दौरान कुछ निहंग गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उनके हाथों में पत्थर भी थे, जिससे आसपास के लोगों में भय और तनाव का माहौल बन गया।

कर्णप्रयाग विवाद से जुड़ी बताई जा रही नाराजगी

जानकारी के अनुसार निहंगों की नाराजगी कर्णप्रयाग में हाल ही में हुए विवाद को लेकर थी। उनका आरोप है कि उस मामले में स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन ने उचित विरोध दर्ज नहीं कराया। इसी असंतोष के चलते नगरासू गुरुद्वारे में विरोध प्रदर्शन किया गया।

कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि गुरुद्वारे परिसर में लगे सूचना पट्टों को हटाया गया और वहां अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की गई।

पुलिस और आईटीबीपी ने संभाला मोर्चा

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस कर्मियों के साथ आईटीबीपी के जवान भी तैनात किए गए हैं।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुरेश बलूनी के अनुसार गुरुद्वारे के भीतर कुल आठ लोग मौजूद हैं, जिनमें सात निहंग शामिल हैं। प्रशासन लगातार बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहा है।

सरकार ने दी सख्त चेतावनी

मामले को लेकर उत्तराखंड सरकार ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। गृह सचिव शैलेश बगोली ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह मामला दो पक्षों के बीच हुए विवाद और भावनात्मक प्रतिक्रिया से जुड़ा प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान शांति, सौहार्द और धार्मिक समरसता से है। किसी भी व्यक्ति या समूह को सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मामले की विस्तृत जांच के लिए आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

सरकार ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने और मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। प्रशासन ने लोगों से संयम बरतने और किसी भी शिकायत के लिए आधिकारिक माध्यमों का उपयोग करने की अपील की है।

चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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