नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर लंबे समय से भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस ने चिकित्सकीय देखभाल के लिए सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बनी, लेकिन पुलिस ने पूरे अभियान को नियंत्रित और सुनियोजित तरीके से पूरा किया। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई ऐसे समय की गई जब प्रदर्शनकारियों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
उच्चस्तरीय बैठक में बनी थी रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के नए आयुक्त अनुराग कुमार के कार्यभार संभालने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसी बैठक में सोनम वांगचुक को आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए अस्पताल ले जाने की योजना तैयार की गई। बताया जा रहा है कि पूरी कार्रवाई को कई स्तरों पर समन्वित ढंग से अंजाम देने की रणनीति बनाई गई थी। हालांकि, पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक रूप से विस्तृत ऑपरेशन प्लान सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कम भीड़ के समय को चुना गया
सूत्रों का दावा है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने सुबह का समय इसलिए चुना, क्योंकि उस समय प्रदर्शन स्थल पर लोगों की संख्या सबसे कम रहती है। बताया गया कि कार्रवाई ऐसे समय शुरू की गई जब आंदोलन से जुड़े प्रमुख सहयोगी अभिजीत दीपके कुछ समय के लिए स्थल से बाहर थे। इससे पुलिस को बिना बड़ी भीड़ के हस्तक्षेप के अपनी प्रक्रिया पूरी करने में आसानी हुई।
सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मी
जानकारी के अनुसार, करीब 30 से 35 पुलिसकर्मी, जिनमें नई दिल्ली जिले की स्पेशल स्टाफ और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल थे, सादे कपड़ों में प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उनका उद्देश्य भीड़ में अनावश्यक हलचल से बचते हुए शांतिपूर्ण तरीके से कार्रवाई को अंजाम देना था। सूत्रों का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने मंच तक पहुंचकर पहले क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लिया और उसके बाद वांगचुक को सुरक्षित तरीके से वहां से बाहर निकाला।
बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरा हुआ ऑपरेशन
सूत्रों के अनुसार, पूरे अभियान को तीन स्तरों में संचालित किया गया। पहले चरण में सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने मंच और आसपास के क्षेत्र को नियंत्रित किया। दूसरे चरण में सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने बैरिकेडिंग के बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित रखा ताकि किसी प्रकार की झड़प या अव्यवस्था न हो। तीसरे चरण में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एंबुलेंस और पुलिस वाहनों के पास स्थापित नियंत्रण बिंदु से पूरे अभियान की निगरानी करते रहे। जैसे ही वांगचुक को एंबुलेंस में बैठाया गया, ट्रैफिक पुलिस ने अस्पताल तक का मार्ग खाली कराया, जिससे वाहन बिना किसी रुकावट के सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुंच सका।
चिकित्सा जरूरत के तहत उठाया गया कदम
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई के दौरान संयम बरता गया और किसी प्रकार के बल प्रयोग से बचने का प्रयास किया गया। साथ ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर का धरना स्थल खाली करें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
अभिजीत दीपके ने लगाए गंभीर आरोप
उधर, आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाया गया। उन्होंने कहा कि इससे आंदोलन समाप्त नहीं होगा और वह स्वयं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे। दीपके ने यह भी कहा कि आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा और 20 जुलाई को प्रस्तावित "संसद चलो" अभियान हर हाल में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया।
अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी जारी
सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, लंबे समय से जारी उपवास और शरीर में पानी की कमी के कारण सोनम वांगचुक कमजोर हो गए हैं। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। उधर, जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन संभावित विरोध प्रदर्शनों और आगामी कार्यक्रमों को देखते हुए स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।