राम मंदिर चढ़ावा विवाद: एसआईटी रिपोर्ट के बाद बड़ी कार्रवाई के संकेत, कई सेवादारों पर गिर सकती है गाज

राम मंदिर चढ़ावा विवाद की SIT जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। रिपोर्ट के बाद कई सेवादारों पर कार्रवाई, दान गणना व्यवस्था में बदलाव और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर बड़े फैसलों के संकेत मिले हैं।;

Update: 2026-06-22 04:26 GMT

लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी पड़ताल लगभग पूरी कर ली है और करीब 140 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य और निष्कर्ष शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके आधार पर आने वाले दिनों में प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

दान गणना व्यवस्था में बड़ा बदलाव

जांच के दौरान सबसे अधिक ध्यान चढ़ावे की राशि की गणना और निगरानी प्रक्रिया पर केंद्रित रहा। सूत्रों के मुताबिक, दान की गिनती में लगे 35 से 40 कर्मचारियों और सेवादारों की भूमिका की समीक्षा की गई है। प्रारंभिक जांच में कुछ लोगों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद उन्हें हटाकर नई व्यवस्था लागू की गई है।

बताया जा रहा है कि अब बैंक की ओर से नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है और पूरी गणना प्रक्रिया को कड़ी निगरानी में संचालित किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और मॉनिटरिंग तंत्र भी विकसित कर रहा है।

कई सेवादारों की सेवाएं समाप्त होने की संभावना

सूत्रों का दावा है कि SIT रिपोर्ट में कुछ सेवादारों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर गंभीर टिप्पणियां दर्ज की गई हैं। हालांकि किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों की सेवाएं समाप्त किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

मंदिर परिसर और धार्मिक संगठनों के बीच इस संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रशासन फिलहाल रिपोर्ट के अंतिम परीक्षण और कानूनी पहलुओं पर विचार कर रहा है।

ट्रस्ट पदाधिकारियों से भी हुई पूछताछ

जांच के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी विस्तृत पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के सचिव से बंद कमरे में कई घंटों तक सवाल-जवाब हुए, जिनमें चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर जानकारी ली गई।

जांच टीम का मानना है कि मंदिर की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कुछ संरचनात्मक बदलावों की आवश्यकता हो सकती है।

अयोध्या में अभी भी सक्रिय है SIT

रिपोर्ट तैयार होने के बावजूद SIT की गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। जांच टीम के कई सदस्य अभी भी अयोध्या में मौजूद हैं और अंतिम सत्यापन का काम जारी है। अधिकारियों का उद्देश्य रिपोर्ट को तथ्यात्मक रूप से मजबूत बनाना और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की पुष्टि करना है।

संत समाज की भी बढ़ी सक्रियता

राम मंदिर से जुड़े इस विवाद पर कई संत और धार्मिक नेता भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। रामलला के पूर्व पक्षकार और हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने जांच एजेंसियों और राज्य सरकार पर भरोसा जताते हुए कहा कि सत्य सामने आना आवश्यक है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

माना जा रहा है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट संरचना और चढ़ावा प्रबंधन प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

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